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क्या चाय पीने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है? जानिए विशेषज्ञ क्या कहते हैं

हम भारतीयों और चाय का रिश्ता कुछ अलग ही है। सुबह नींद खुलते ही सबसे पहले चाय की याद आती है। घर में मेहमान आ जाएं तो चाय, ऑफिस में थोड़ा थकान महसूस हो तो चाय, दोस्तों के साथ गपशप करनी हो तो भी चाय। कुल मिलाकर चाय हमारी रोज की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है। लेकिन जब किसी को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो जाती है, तब यही चाय थोड़ा चिंता का कारण भी बन जाती है। ऐसे में मन में अक्सर एक सवाल आता है कि कहीं रोज पी जाने वाली चाय ही तो BP बढ़ाने की वजह नहीं बन रही?अगर आपके मन में भी यह सवाल है, तो आप अकेले नहीं हैं। बहुत से लोग डॉक्टर से यही पूछते हैं कि क्या अब उन्हें चाय छोड़ देनी चाहिए या फिर पहले की तरह चाय पी सकते हैं। दरअसल, इस उलझन की वजह चाय में मौजूद कैफीन है। अक्सर लोग सुनते हैं कि कैफीन ब्लड प्रेशर बढ़ा सकती है। बस यहीं से चिंता शुरू हो जाती है। फिर कोई कहता है कि चाय बिल्कुल मत पीजिए, तो कोई कहता है कि दो-तीन कप चाय से कुछ नहीं होता। ऐसे में समझ ही नहीं आता कि सही बात क्या है।

इसके अलावा कुछ लोगों के मन में यह सवाल भी रहता है कि क्या दूध वाली चाय और ग्रीन टी का असर एक जैसा होता है? क्या दिन में कई बार चाय पीना ठीक है? और अगर पहले से BP की दवा चल रही है, तो क्या चाय पीने में कोई सावधानी रखनी चाहिए? इन सभी सवालों के जवाब जानना जरूरी है, क्योंकि बात सिर्फ चाय की नहीं बल्कि आपकी सेहत की भी है। इसलिए इस लेख में हम आसान भाषा में समझेंगे कि चाय का ब्लड प्रेशर पर कितना असर पड़ता है, किन लोगों को सावधान रहने की जरूरत होती है और विशेषज्ञ इस बारे में क्या सलाह देते हैं। आज का यह लेख शुरू करने से पहले हम आपको बताना चाहते हैं कि इसे दुनिया की कई प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा किए गए शोधों और अध्ययनों के आधार पर तैयार किया गया है। इस लेख का उद्देश्य चाय के सेवन को लेकर लोगों के बीच फैली गलत धारणाओं और भ्रम को दूर करना है।हालाँकि, हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि हम कोई मेडिकल संस्थान नहीं हैं। इसलिए यदि आपको ब्लड प्रेशर या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या से जुड़ी कोई परेशानी है, तो केवल इस लेख में दी गई जानकारी पर निर्भर न रहें। सही सलाह और उपचार के लिए किसी योग्य डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। अब आइए विस्तार से समझते हैं कि चाय और ब्लड प्रेशर के बीच वास्तव में क्या संबंध है।

क्या सचमुच चाय पीने से BP बढ़ता है?

इस सवाल का सीधा जवाब देना थोड़ा मुश्किल है, क्योंकि यह हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं होता। दरअसल, चाय में कैफीन नाम का एक तत्व पाया जाता है, जो कुछ लोगों के ब्लड प्रेशर पर थोड़े समय के लिए असर डाल सकता है। जब आप चाय पीते हैं, तो कैफीन शरीर में पहुंचकर तंत्रिका तंत्र को सक्रिय कर देती है। इसकी वजह से कुछ लोगों का ब्लड प्रेशर थोड़ी देर के लिए सामान्य से थोड़ा बढ़ सकता है। लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि चाय पीने वाला हर व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर का मरीज बन जाएगा। वास्तव में ज्यादातर लोगों में यह असर बहुत मामूली और कुछ समय के लिए ही होता है। यही कारण है कि अगर चाय पीने के तुरंत बाद किसी व्यक्ति का BP थोड़ा बढ़ा हुआ दिखाई दे, तो इसे हमेशा गंभीर समस्या नहीं माना जाता। आमतौर पर कुछ समय बाद ब्लड प्रेशर फिर से अपने सामान्य स्तर पर आ जाता है। इसी वजह से स्वास्थ्य विशेषज्ञ और डॉक्टर केवल चाय पीने को हाई ब्लड प्रेशर होने की मुख्य वजह नहीं मानते। उनका मानना है कि ब्लड प्रेशर बढ़ने के पीछे खानपान, तनाव, शारीरिक गतिविधियों की कमी, बढ़ती उम्र और आनुवंशिक कारण जैसे कई अन्य कारक भी जिम्मेदार हो सकते हैं।

चाय में मौजूद कैफीन ब्लड प्रेशर को कैसे प्रभावित करती है?

जब भी यह चर्चा होती है कि चाय ब्लड प्रेशर बढ़ाती है या नहीं, तो सबसे पहले जिस तत्व का नाम सामने आता है, वह है कैफीन। आखिर यही वह प्राकृतिक घटक है जो चाय पीने के बाद हमें तरोताजा, ऊर्जावान और पहले से अधिक सक्रिय महसूस कराता है।

दरअसल, कैफीन एक प्राकृतिक स्टिमुलेंट (उत्तेजक) है, जो हमारे मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करने का काम करती है। यही वजह है कि सुबह की एक कप चाय कई लोगों की नींद और सुस्ती को मिनटों में दूर कर देती है।

लेकिन इसी प्रक्रिया के दौरान कैफीन शरीर में कुछ ऐसी प्रतिक्रियाएं भी पैदा कर सकती है, जिनका असर ब्लड प्रेशर पर दिखाई दे सकता है। कुछ लोगों में चाय पीने के बाद थोड़े समय के लिए हृदय की कार्यप्रणाली में हल्का बदलाव महसूस हो सकता है, जबकि कुछ लोगों के रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) की प्रतिक्रिया भी अस्थायी रूप से बदल सकती है। इसके परिणामस्वरूप ब्लड प्रेशर में हल्की और थोड़े समय के लिए वृद्धि देखी जा सकती है।

हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना बेहद जरूरी है—कैफीन का प्रभाव हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता।

उदाहरण के लिए, जो लोग नियमित रूप से चाय पीते हैं, उनका शरीर समय के साथ कैफीन का आदी हो जाता है। ऐसे लोगों में ब्लड प्रेशर पर इसका प्रभाव अक्सर बहुत कम या लगभग न के बराबर होता है। वहीं दूसरी ओर, जो लोग कभी-कभार चाय पीते हैं या कैफीन के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, उन्हें इसका असर अपेक्षाकृत ज्यादा महसूस हो सकता है।

यही कारण है कि एक व्यक्ति दिन में कई कप चाय पीकर भी सामान्य महसूस करता है, जबकि दूसरे व्यक्ति को एक या दो कप चाय के बाद ही दिल की धड़कन तेज या हल्की बेचैनी महसूस हो सकती है। इसलिए यह कहना कि चाय हर व्यक्ति का ब्लड प्रेशर बढ़ा देती है, पूरी तरह सही नहीं होगा। वास्तव में इसका प्रभाव व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, कैफीन सहनशीलता और सेवन की मात्रा पर निर्भर करता है।

क्या सभी प्रकार की चाय BP बढ़ाती हैं?

जब भी चाय और ब्लड प्रेशर की बात होती है, तो कई लोग मान लेते हैं कि हर तरह की चाय का असर एक जैसा होता होगा। लेकिन सच बात यह है कि ऐसा नहीं है।

हर चाय में कैफीन की मात्रा अलग-अलग होती है। यही वजह है कि शरीर पर उनका असर भी थोड़ा अलग हो सकता है। आइए एक-एक करके समझते हैं।

ब्लैक टी और BP

हममें से ज्यादातर लोग रोज जिस चाय का सेवन करते हैं, वह ब्लैक टी की पत्तियों से ही बनाई जाती है। दूध वाली सामान्य चाय भी इसी श्रेणी में आती है।

क्योंकि इसमें कैफीन मौजूद होती है, इसलिए बहुत ज्यादा मात्रा में पीने पर कुछ लोगों का ब्लड प्रेशर थोड़ी देर के लिए बढ़ सकता है। हालांकि अगर आप दिन में एक या दो कप सामान्य मात्रा में चाय पीते हैं, तो आमतौर पर इसकी वजह से चिंता करने की जरूरत नहीं होती।

यही कारण है कि ज्यादातर डॉक्टर भी सीमित मात्रा में चाय पीने को सुरक्षित मानते हैं।

ग्रीन टी और BP

पिछले कुछ वर्षों में ग्रीन टी काफी लोकप्रिय हुई है। बहुत से लोग इसे वजन नियंत्रित रखने और बेहतर स्वास्थ्य के लिए पीना पसंद करते हैं।

ग्रीन टी में भी कैफीन होती है, लेकिन सामान्य तौर पर इसकी मात्रा साधारण चाय की तुलना में कम होती है। इसके अलावा इसमें ऐसे कई प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर के लिए फायदेमंद माने जाते हैं।

इसी वजह से कई लोग अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में ग्रीन टी को शामिल करते हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इसे जरूरत से ज्यादा पिया जाए। किसी भी चीज की तरह इसका सेवन भी संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए।

हर्बल टी और BP

अगर आप कैफीन से बचना चाहते हैं, तो हर्बल टी एक अच्छा विकल्प हो सकती है। तुलसी टी, कैमोमाइल टी, अदरक टी या पुदीना टी जैसी कई हर्बल चाय में आमतौर पर कैफीन नहीं होती। यही वजह है कि कुछ लोग शाम के समय या सोने से पहले हर्बल टी पीना पसंद करते हैं। हालांकि किसी विशेष हर्बल टी का नियमित सेवन शुरू करने से पहले उसके बारे में सही जानकारी लेना भी जरूरी होता है, खासकर तब जब आप पहले से किसी बीमारी की दवा ले रहे हों। 

आइये वैज्ञानिक शोधों के द्वारा इसे समझने का प्रयास करते है

1. हार्वर्ड टी.एच. चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ (Harvard University, USA)

जब भी खानपान और स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर बात होती है, तो हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधों को काफी महत्व दिया जाता है। चाय और ब्लड प्रेशर के संबंध को समझने के लिए भी हार्वर्ड के शोधकर्ताओं ने कई वर्षों तक अलग-अलग अध्ययनों के आंकड़ों का विश्लेषण किया।

इस शोध कार्य में डॉ. हॉवर्ड सेसो (Dr. Howard Sesso) और प्रोफेसर एरिक रिम (Prof. Eric Rimm) जैसे जाने-माने विशेषज्ञ शामिल थे। इन विशेषज्ञों ने हजारों पुरुषों और महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन किया और यह समझने की कोशिश की कि नियमित रूप से चाय पीने का हृदय और ब्लड प्रेशर पर क्या प्रभाव पड़ता है।

शोध के दौरान यह देखा गया कि जो लोग अपनी दैनिक दिनचर्या में सीमित मात्रा में चाय का सेवन करते थे, उनके स्वास्थ्य परिणाम कई मामलों में बेहतर दिखाई दिए। विशेष रूप से उन लोगों में हाई ब्लड प्रेशर विकसित होने का जोखिम अपेक्षाकृत कम पाया गया जो नियमित रूप से दिन में लगभग 2 से 3 कप चाय पीते थे।

अध्ययन के निष्कर्षों के अनुसार, ऐसे लोगों में हाई ब्लड प्रेशर होने का खतरा चाय न पीने वाले लोगों की तुलना में लगभग 14 प्रतिशत कम पाया गया। यह परिणाम उन लोगों के लिए काफी दिलचस्प था जो यह मानते हैं कि चाय केवल ब्लड प्रेशर बढ़ाने का काम करती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसका एक कारण चाय में पाए जाने वाले फ्लेवोनोइड्स (Flavonoids) हो सकते हैं। फ्लेवोनोइड्स प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो शरीर में होने वाले ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं।

डॉ. हॉवर्ड सेसो के अनुसार, चाय में मौजूद ये तत्व हृदय और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में भूमिका निभा सकते हैं। जब रक्त वाहिकाएं स्वस्थ रहती हैं, तो रक्त का प्रवाह भी बेहतर बना रहता है, जिसका सकारात्मक प्रभाव ब्लड प्रेशर पर पड़ सकता है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल चाय पीने से ही ब्लड प्रेशर नियंत्रित नहीं किया जा सकता। स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम, तनाव पर नियंत्रण और अच्छी जीवनशैली भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। फिर भी इस शोध ने यह जरूर संकेत दिया कि संतुलित मात्रा में चाय का सेवन अधिकांश लोगों के लिए नुकसानदायक नहीं माना जा सकता और यह हृदय स्वास्थ्य के लिए कुछ लाभ भी प्रदान कर सकता है।

2. ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन और यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग (University of Reading, UK)

चाय और हृदय स्वास्थ्य के बीच संबंध को बेहतर तरीके से समझने के लिए यूनाइटेड किंगडम में भी कई महत्वपूर्ण शोध किए गए हैं। इन्हीं में से एक प्रमुख अध्ययन ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन (British Heart Foundation) और यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया था।

इस अध्ययन का नेतृत्व प्रोफेसर गंटर कुह्नले (Prof. Gunter Kuhnle) और उनकी टीम ने किया। शोधकर्ताओं का उद्देश्य यह जानना था कि लोगों के रोजमर्रा के खानपान में मौजूद फ्लेवानॉल (Flavanols) नामक तत्व का ब्लड प्रेशर और हृदय स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है। फ्लेवानॉल्स प्राकृतिक यौगिक होते हैं, जो चाय, कोको और कुछ फलों में पाए जाते हैं।

इस शोध के लिए यूके बायोबैंक (UK Biobank) के 25,000 से अधिक लोगों के स्वास्थ्य और खानपान से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन किया गया। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों की भोजन संबंधी आदतों, उनके द्वारा लिए जाने वाले पोषक तत्वों और ब्लड प्रेशर के स्तर का आपस में मिलान किया, ताकि यह समझा जा सके कि फ्लेवानॉल्स का शरीर पर कोई सकारात्मक प्रभाव पड़ता है या नहीं।

जब शोध के परिणाम सामने आए, तो उन्होंने कई लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों के आहार में फ्लेवानॉल्स की मात्रा अधिक थी, उनका ब्लड प्रेशर अपेक्षाकृत बेहतर पाया गया। खास बात यह रही कि ऐसे लोगों का सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर औसतन 2 से 4 mmHg तक कम देखा गया।

पहली नजर में यह अंतर बहुत बड़ा नहीं लगता, लेकिन हृदय स्वास्थ्य के क्षेत्र में इसे एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लड प्रेशर में थोड़ी-सी कमी भी लंबे समय में हृदय रोगों और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।

प्रोफेसर कुह्नले और उनकी टीम ने यह भी बताया कि यह लाभ विशेष रूप से उन लोगों में अधिक स्पष्ट दिखाई दिया, जिनका ब्लड प्रेशर पहले से सामान्य स्तर से अधिक था। शोधकर्ताओं के अनुसार, चाय में पाए जाने वाले फ्लेवानॉल्स रक्त वाहिकाओं के कार्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं, जिससे रक्त का प्रवाह अधिक सुचारु रूप से हो पाता है।

हालांकि इस अध्ययन का उद्देश्य लोगों को अधिक मात्रा में चाय पीने की सलाह देना नहीं था। शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि अच्छे परिणाम संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के साथ ही देखने को मिलते हैं। इसलिए केवल चाय के भरोसे ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने की उम्मीद करना सही नहीं होगा।

फिर भी इस शोध ने यह संकेत जरूर दिया कि संतुलित मात्रा में चाय का सेवन, विशेष रूप से फ्लेवानॉल्स से भरपूर चाय, हृदय और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य के लिए सकारात्मक भूमिका निभा सकती है। यही कारण है कि आज कई स्वास्थ्य विशेषज्ञ चाय को केवल एक सामान्य पेय के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे पेय के रूप में भी देखते हैं जो सही मात्रा में सेवन किए जाने पर स्वास्थ्य को कुछ अतिरिक्त लाभ दे सकता है। 

3. चाइनीज एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज (Beijing, China)

चाय के स्वास्थ्य प्रभावों पर किए गए बड़े शोधों की बात करें तो चीन में किया गया यह अध्ययन काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। चूंकि चीन दुनिया के उन देशों में शामिल है जहाँ सदियों से चाय पीने की परंपरा रही है, इसलिए वहाँ के वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि नियमित रूप से चाय पीने का लोगों के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है। इसी उद्देश्य से चाइनीज एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज (Chinese Academy of Medical Sciences) के शोधकर्ताओं ने एक बड़े अध्ययन की शुरुआत की। इस शोध का नेतृत्व डॉ. शिन्यान वांग (Dr. Xinyan Wang) और उनकी टीम ने किया।

यह अध्ययन China-PAR Project का हिस्सा था, जिसे दुनिया के सबसे बड़े स्वास्थ्य अध्ययनों में से एक माना जाता है। इस शोध में 1 लाख से अधिक यानी 1,00,902 वयस्कों को शामिल किया गया और उनके स्वास्थ्य पर लगभग 7.3 वर्षों तक लगातार नज़र रखी गई। इतने लंबे समय तक लोगों की जीवनशैली, खानपान की आदतों और स्वास्थ्य से जुड़े बदलावों का रिकॉर्ड रखा गया, ताकि अधिक सटीक परिणाम प्राप्त किए जा सकें। शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने यह जानने की कोशिश की कि नियमित रूप से चाय पीने वाले लोगों और चाय न पीने वाले लोगों के स्वास्थ्य में क्या अंतर देखने को मिलता है। विशेष रूप से हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक जैसी समस्याओं पर ध्यान दिया गया।

अध्ययन के नतीजों में पाया गया कि जो लोग सप्ताह में कम से कम तीन बार चाय पीते थे, उनमें हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्याओं का जोखिम अपेक्षाकृत कम था। यह लाभ खासतौर पर उन लोगों में अधिक देखा गया जो नियमित रूप से ग्रीन टी का सेवन करते थे। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि नियमित रूप से चाय पीने वाले लोगों में हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक का खतरा अपेक्षाकृत कम था। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और अन्य प्राकृतिक तत्व रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं, जिससे हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम कम हो सकता है।

इस अध्ययन का एक और दिलचस्प निष्कर्ष यह था कि नियमित रूप से चाय पीने वाले लोगों की औसत जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) भी अधिक देखी गई। शोध के आंकड़ों के अनुसार, ऐसे लोगों की जीवन प्रत्याशा औसतन लगभग 1.2 वर्ष अधिक थी। हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि केवल चाय पीने से जीवन लंबा हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे स्वस्थ जीवनशैली, बेहतर खानपान और अन्य कई कारक भी भूमिका निभा सकते हैं।

डॉ. शिन्यान वांग और उनकी टीम का निष्कर्ष था कि यदि चाय का सेवन संतुलित मात्रा में किया जाए और उसके साथ स्वस्थ जीवनशैली अपनाई जाए, तो यह हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। यही कारण है कि आज भी चाय, विशेष रूप से ग्रीन टी, पर दुनिया भर में लगातार शोध किए जा रहे हैं ताकि इसके स्वास्थ्य लाभों को और बेहतर तरीके से समझा जा सके।

4. यूके बायोबैंक स्टडी (UK Biobank Study – 2020)

चाय और ब्लड प्रेशर के संबंध को समझने के लिए वर्ष 2020 में एक महत्वपूर्ण अध्ययन किया गया, जिसने दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। यह शोध यूनाइटेड किंगडम की यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग (University of Reading) के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया था, जिसका नेतृत्व डॉ. गंटर कुह्नले (Dr. Gunter Kuhnle) और उनकी टीम ने किया।

इस अध्ययन के परिणाम अक्टूबर 2020 में प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल Scientific Reports (Nature Portfolio) में प्रकाशित किए गए थे। चूंकि यह शोध एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था, इसलिए इसे काफी विश्वसनीय माना जाता है।

शोधकर्ताओं ने यूके बायोबैंक (UK Biobank) में शामिल 25,000 से अधिक लोगों के स्वास्थ्य और खानपान से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया। उनका उद्देश्य यह जानना था कि चाय में पाए जाने वाले फ्लेवानॉल्स (Flavanols) का ब्लड प्रेशर पर कोई प्रभाव पड़ता है या नहीं।

अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों के खानपान, जीवनशैली और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का विस्तृत मूल्यांकन किया। इसके बाद उन लोगों की तुलना की गई जो नियमित रूप से फ्लेवानॉल्स युक्त खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों, विशेष रूप से चाय, का सेवन करते थे और उन लोगों की जो इनका सेवन बहुत कम करते थे।

शोध के नतीजों में पाया गया कि जिन लोगों के शरीर में फ्लेवानॉल्स की मात्रा अधिक थी, उनका ब्लड प्रेशर अपेक्षाकृत बेहतर था। आंकड़ों के अनुसार, ऐसे लोगों का ब्लड प्रेशर औसतन 2 से 4 mmHg तक कम दर्ज किया गया।

पहली नजर में यह अंतर छोटा लग सकता है, लेकिन हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार ब्लड प्रेशर में इतनी कमी भी लंबे समय में हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।

शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि चाय में पाए जाने वाले फ्लेवानॉल्स रक्त वाहिकाओं के कार्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। जब रक्त वाहिकाएं स्वस्थ रहती हैं, तो रक्त का प्रवाह अधिक सुचारु रूप से होता है, जिससे ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायता मिल सकती है।

हालांकि इस अध्ययन का उद्देश्य लोगों को अत्यधिक मात्रा में चाय पीने के लिए प्रोत्साहित करना नहीं था। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि अच्छे परिणाम तभी देखने को मिलते हैं जब संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली को भी साथ में अपनाया जाए।

इस शोध से इतना जरूर पता चलता है कि सीमित मात्रा में चाय का सेवन करने वाले अधिकांश लोगों में ब्लड प्रेशर को लेकर अनावश्यक डर की आवश्यकता नहीं है। बल्कि चाय में मौजूद कुछ प्राकृतिक तत्व हृदय और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य के लिए सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं।

5. ब्लैक टी और ब्लड प्रेशर पर रैंडमाइज्ड क्लिनिकल ट्रायल

अक्सर यह माना जाता है कि ब्लैक टी में मौजूद कैफीन ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकती है। लेकिन इस विषय पर वैज्ञानिकों ने केवल अनुमान लगाने के बजाय वास्तविक क्लिनिकल ट्रायल भी किए हैं, ताकि यह समझा जा सके कि नियमित रूप से ब्लैक टी पीने का शरीर पर वास्तव में क्या प्रभाव पड़ता है। इसी उद्देश्य से यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया (University of Western Australia) के प्रोफेसर जोनाथन हॉजसन (Prof. Jonathan Hodgson) और उनकी टीम ने एक महत्वपूर्ण शोध किया। इस अध्ययन के निष्कर्ष प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल Archives of Internal Medicine में प्रकाशित किए गए थे।

इस शोध की खास बात यह थी कि यह केवल लोगों की आदतों का अवलोकन करने वाला अध्ययन नहीं था, बल्कि एक रैंडमाइज्ड क्लिनिकल ट्रायल था। यानी शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों को नियंत्रित परिस्थितियों में शामिल किया और उनके स्वास्थ्य पर नियमित रूप से निगरानी रखी। अध्ययन के दौरान प्रतिभागियों के एक समूह को प्रतिदिन लगभग तीन कप ब्लैक टी दी गई, जबकि दूसरे समूह को ऐसा पेय दिया गया जिसमें ब्लैक टी के सक्रिय तत्व मौजूद नहीं थे। इसके बाद दोनों समूहों के ब्लड प्रेशर और अन्य स्वास्थ्य संकेतकों की तुलना की गई।

शोधकर्ताओं ने कई महीनों तक प्रतिभागियों के स्वास्थ्य पर नजर रखी और यह जानने की कोशिश की कि नियमित ब्लैक टी सेवन का ब्लड प्रेशर पर कोई सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव पड़ता है या नहीं। जब अध्ययन के परिणाम सामने आए, तो उन्होंने कई लोगों की धारणा को बदलने का काम किया। शोध में पाया गया कि नियमित रूप से ब्लैक टी पीने वाले लोगों के 24 घंटे के औसत सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर में लगभग 2 से 3 mmHg तक की कमी दर्ज की गई।

हालांकि यह कमी बहुत बड़ी नहीं थी, लेकिन हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार ब्लड प्रेशर में इतनी भी कमी लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए लाभदायक मानी जाती है। विशेष रूप से उन लोगों के लिए, जिनका ब्लड प्रेशर सामान्य से थोड़ा अधिक रहता है, यह बदलाव महत्वपूर्ण हो सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि ब्लैक टी में केवल कैफीन ही नहीं होती, बल्कि इसमें पॉलीफेनॉल्स (Polyphenols) और अन्य एंटीऑक्सीडेंट तत्व भी पाए जाते हैं। ये तत्व रक्त वाहिकाओं की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने और रक्त प्रवाह को सुचारु रखने में मदद कर सकते हैं। संभवतः यही कारण है कि ब्लैक टी का प्रभाव केवल कैफीन तक सीमित नहीं रहता।

इस अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह था कि सीमित और नियमित मात्रा में ब्लैक टी पीना जरूरी नहीं कि ब्लड प्रेशर को बढ़ाए। बल्कि कुछ परिस्थितियों में इसका संबंध ब्लड प्रेशर में हल्की कमी से भी देखा गया। हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल ब्लैक टी के भरोसे ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। स्वस्थ भोजन, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार आज भी ब्लड प्रेशर प्रबंधन के सबसे महत्वपूर्ण आधार हैं।

फिर भी, यह अध्ययन उन लोगों के लिए राहत भरी खबर लेकर आया जो यह सोचकर परेशान रहते हैं कि उनकी रोज की एक-दो या तीन कप चाय कहीं उनके ब्लड प्रेशर को नुकसान तो नहीं पहुंचा रही। इस शोध के अनुसार, संतुलित मात्रा में ब्लैक टी का सेवन अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित माना जा सकता है।

6. हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग (Harvard Health Publishing) की रिपोर्ट क्या कहती है

जब भी स्वास्थ्य से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी की बात होती है, तो हार्वर्ड मेडिकल स्कूल (Harvard Medical School) का नाम सबसे पहले लिए जाने वाले संस्थानों में शामिल होता है। हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग समय-समय पर हृदय स्वास्थ्य, खानपान और जीवनशैली से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों की राय और वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर रिपोर्ट प्रकाशित करता रहता है। चाय और ब्लड प्रेशर के विषय पर भी हार्वर्ड के विशेषज्ञों ने कई शोधों और उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों का विश्लेषण किया है। इन रिपोर्ट्स का उद्देश्य यह समझना था कि चाय में मौजूद प्राकृतिक तत्व हृदय और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य को किस प्रकार प्रभावित करते हैं।

हार्वर्ड हेल्थ की रिपोर्ट्स के अनुसार, चाय में कई ऐसे एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो शरीर के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। इनमें विशेष रूप से ईजीसीजी (EGCG – Epigallocatechin Gallate) और थियाफ्लेविन्स (Theaflavins) का नाम प्रमुख है। ये तत्व ग्रीन टी और ब्लैक टी दोनों में अलग-अलग मात्रा में पाए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ये एंटीऑक्सीडेंट हमारी रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत,  जिसे एंडोथीलियम (Endothelium) कहा जाता है, को स्वस्थ बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। एंडोथीलियम का काम रक्त वाहिकाओं को लचीला बनाए रखना और रक्त प्रवाह को सुचारु रूप से चलने देना होता है। जब यह परत स्वस्थ रहती है, तो रक्त वाहिकाएं जरूरत के अनुसार आसानी से फैल और सिकुड़ पाती हैं। इसके विपरीत, यदि एंडोथीलियम ठीक से काम न करे, तो रक्त वाहिकाएं कठोर होने लगती हैं और रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है। ऐसी स्थिति में ब्लड प्रेशर बढ़ने का जोखिम भी बढ़ सकता है।

हार्वर्ड के विशेषज्ञों का मानना है कि चाय में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स एंडोथीलियम की कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने में सहायता कर सकते हैं। यही कारण है कि नियमित और संतुलित मात्रा में चाय पीने वाले लोगों में हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़े कुछ सकारात्मक प्रभाव देखे गए हैं। हालांकि हार्वर्ड हेल्थ यह भी स्पष्ट करता है कि चाय कोई दवा नहीं है और इसे हाई ब्लड प्रेशर के उपचार का विकल्प नहीं माना जा सकता। यदि किसी व्यक्ति को पहले से हाई बीपी की समस्या है, तो उसे डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं और सलाह का पालन करना चाहिए।

फिर भी उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण यह संकेत देते हैं कि सीमित मात्रा में चाय का सेवन अधिकांश स्वस्थ लोगों के लिए सुरक्षित माना जाता है। साथ ही, इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स हृदय और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक भूमिका निभा सकते हैं। यही वजह है कि आज कई हृदय रोग विशेषज्ञ चाय को केवल एक सामान्य पेय के रूप में नहीं देखते, बल्कि उसे एक ऐसे पेय के रूप में भी मानते हैं जिसमें कुछ प्राकृतिक तत्व मौजूद हैं जो लंबे समय में हृदय स्वास्थ्य को समर्थन देने में मदद कर सकते हैं। 

निष्कर्ष

चाय पीने से हर व्यक्ति का ब्लड प्रेशर नहीं बढ़ता। सीमित मात्रा में चाय का सेवन अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित माना जाता है। चाय में मौजूद कैफीन कुछ लोगों में अस्थायी रूप से BP बढ़ा सकती है, लेकिन इसके एंटीऑक्सीडेंट्स हृदय और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य को भी लाभ पहुंचा सकते हैं। इसलिए संतुलित मात्रा में चाय और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना सबसे बेहतर विकल्प है।

चाय और ब्लड प्रेशर से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
किन लोगों को चाय पीते समय अधिक सावधानी बरतनी चाहिए?

हालांकि अधिकांश लोग सुरक्षित रूप से चाय का सेवन कर सकते हैं, लेकिन कुछ लोगों को थोड़ी अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

हाई ब्लड प्रेशर के मरीज
यदि आपका BP पहले से अधिक रहता है, तो यह समझना जरूरी है कि चाय पीने के बाद आपके शरीर की प्रतिक्रिया कैसी है।
कैफीन के प्रति संवेदनशील लोग
कुछ लोगों को चाय पीने के बाद घबराहट, बेचैनी या दिल की धड़कन तेज होने जैसी समस्याएं महसूस होती हैं। ऐसे लोगों को अपने सेवन पर ध्यान देना चाहिए।
बुजुर्ग व्यक्ति
उम्र बढ़ने के साथ शरीर की प्रतिक्रियाएं बदल सकती हैं। इसलिए बुजुर्गों को अत्यधिक कैफीन से बचना चाहिए।
तनावग्रस्त व्यक्ति
यदि आप पहले से तनाव में हैं और दिनभर कई कप चाय पीते हैं, तो इसका प्रभाव अधिक महसूस हो सकता है।

हाई BP के मरीज दिन में कितनी चाय पी सकते हैं?

यह सवाल लगभग हर हाई BP मरीज पूछता है।
सामान्यतः दिन में 2–3 कप चाय अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित मानी जाती है। हालांकि यह कोई सार्वभौमिक नियम नहीं है।
कुछ लोगों को इससे कम मात्रा में भी कैफीन का प्रभाव महसूस हो सकता है, जबकि कुछ लोग इससे अधिक मात्रा का सेवन करने के बावजूद सामान्य महसूस करते हैं।
इसलिए सबसे महत्वपूर्ण बात है कि आप अपने शरीर की प्रतिक्रिया को समझें।
यदि चाय पीने के बाद आपको बेचैनी, सिरदर्द या दिल की धड़कन तेज महसूस होती है, तो मात्रा कम करना बेहतर होगा।

क्या दूध वाली चाय और बिना दूध वाली चाय का BP पर अलग प्रभाव पड़ता है?

भारत में अधिकांश लोग दूध वाली चाय पीना पसंद करते हैं। इसलिए यह सवाल भी काफी महत्वपूर्ण है। दूध स्वयं ब्लड प्रेशर बढ़ाने के लिए जिम्मेदार नहीं माना जाता। चाय के संदर्भ में मुख्य भूमिका कैफीन की होती है। हालांकि यदि चाय में बहुत अधिक चीनी डाली जाए या दिनभर में बार-बार मीठी चाय पी जाए, तो यह समग्र स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। इसलिए केवल दूध वाली चाय को BP बढ़ाने का कारण मानना सही नहीं होगा।

चाय पीने का सही समय क्या है यदि आपको हाई BP की समस्या है?

यदि आपको हाई BP है, तो चाय का समय भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
विशेषज्ञ अक्सर सलाह देते हैं कि:
खाली पेट अत्यधिक चाय न पिएं।
देर रात चाय पीने से बचें।
भोजन के तुरंत बाद बहुत अधिक चाय न लें।
दिनभर पर्याप्त पानी पीते रहें।
इन छोटी-छोटी आदतों से चाय का आनंद भी बना रहता है और स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है।

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