भारत में चाय पीने का अपना ही एक अंदाज है। सुबह की शुरुआत चाय से होती है और दिनभर की थकान के बीच भी एक कप चाय मिल जाए तो मन हल्का महसूस करता है। परेशानी चाय पीने से नहीं, बल्कि उसमें जरूरत से ज्यादा चीनी मिलाने की आदत से जुड़ी हो सकती है। बहुत से लोग दिन में कई बार चाय पीते हैं और हर कप में दो या तीन चम्मच चीनी डालते हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या लंबे समय तक इतनी अधिक चीनी लेना हमारे हृदय के लिए नुकसानदायक हो सकता है?
इस सवाल का जवाब समझने के लिए चाय और चीनी को अलग-अलग देखना होगा। चाय अपने आप में हृदय के लिए नुकसानदायक नहीं मानी जाती, लेकिन उसमें मिलाई गई अतिरिक्त चीनी यदि लंबे समय तक अधिक मात्रा में ली जाए, तो यह स्वास्थ्य के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है।
इस विषय पर विशेषज्ञों की क्या राय है?
हृदय स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कभी-कभार मीठी चाय पीना और रोजाना कई कप अधिक चीनी वाली चाय पीना, दोनों को एक ही नजर से नहीं देखा जा सकता। चिंता तब बढ़ती है जब चीनी का सेवन रोज की आदत बन जाए और चाय के अलावा मिठाई, मीठे पेय, बिस्कुट तथा दूसरी चीजों से भी शरीर को काफी मात्रा में अतिरिक्त चीनी मिलती रहे।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की आहार संबंधी सलाह में भी हृदय को स्वस्थ रखने के लिए भोजन में अतिरिक्त चीनी की मात्रा सीमित रखने पर जोर दिया गया है। अधिक चीनी लेने से शरीर में अतिरिक्त कैलोरी पहुंचती है और लंबे समय में वजन बढ़ने जैसी समस्या हो सकती है। इसके साथ ही रक्त में वसा यानी ट्राइग्लिसराइड और रक्तचाप जैसे हृदय रोग से जुड़े जोखिम कारकों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि केवल मीठी चाय पीने से हृदय रोग हो जाता है। असली चिंता उस स्थिति में होती है, जब अधिक चीनी का सेवन लंबे समय तक हमारी रोजमर्रा की आदत बना रहता है।
वैज्ञानिक शोधों में क्या सामने आया है?
चीनी के अधिक सेवन और हृदय स्वास्थ्य के बीच संबंध को समझने के लिए कई वैज्ञानिक अध्ययन किए गए हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के वैज्ञानिक विश्लेषण में बताया गया है कि अतिरिक्त चीनी का अधिक सेवन रक्तचाप और ट्राइग्लिसराइड जैसे हृदय रोग से जुड़े कुछ जोखिम कारकों को प्रभावित कर सकता है।
इसी तरह अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की हृदय रोग संबंधी दिशा-निर्देशों में भी अधिक चीनी वाले पेय पदार्थों के सेवन को हृदय संबंधी जोखिम से जोड़कर देखा गया है। इसमें चीनी वाली चाय और कॉफी जैसे पेय भी शामिल हो सकते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन भी भोजन में मौजूद मुक्त शर्करा की मात्रा सीमित रखने की सलाह देता है। संगठन के अनुसार, एक स्वस्थ व्यक्ति को अपनी रोजाना कुल ऊर्जा का 10 प्रतिशत से कम हिस्सा मुक्त शर्करा से प्राप्त करना चाहिए। इसे लगभग 5 प्रतिशत या उससे कम रखने पर स्वास्थ्य को अतिरिक्त लाभ मिल सकता है।
इन शोधों से यह समझ आता है कि समस्या किसी एक कप चाय की नहीं है। मुख्य चिंता उस आदत की है जिसमें व्यक्ति रोजाना आवश्यकता से कहीं अधिक चीनी का सेवन करता रहता है।
निष्कर्ष और लोगों के सामान्य सवाल
अगर आपको चाय पीना पसंद है, तो केवल हृदय को स्वस्थ रखने के लिए चाय छोड़ने की जरूरत नहीं है। इसकी जगह चाय में डाली जाने वाली चीनी की मात्रा पर ध्यान देना अधिक समझदारी होगी। यदि आप हर कप में दो या तीन चम्मच चीनी लेते हैं, तो उसे अचानक बंद करने के बजाय धीरे-धीरे कम किया जा सकता है। कुछ समय बाद कम मीठी चाय की आदत आसानी से बन सकती है।
साथ ही यह भी देखना जरूरी है कि दिनभर में मिठाई, बिस्कुट, मीठे पेय और दूसरी चीजों के माध्यम से कितनी अतिरिक्त चीनी शरीर में जा रही है। हृदय को स्वस्थ रखने के लिए केवल चाय में चीनी कम करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे खान-पान की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है।