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क्या ज्यादा चाय पीने से पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन लेवल कम हो सकता है? जानिए विज्ञान, रिसर्च और सच्चाई

आज के समय में चाय केवल एक पेय नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। भारत में शायद ही कोई ऐसा घर हो, जहाँ सुबह की शुरुआत चाय के बिना होती है। कई लोग दिन में केवल एक या दो कप चाय पीते हैं, जबकि कुछ लोगों के लिए हर दो-तीन घंटे में एक कप चाय पीना उनकी दिनचर्या का सामान्य हिस्सा बन जाता है। लेकिन जैसे-जैसे स्वास्थ्य संबंधी जानकारी लोगों तक अधिक पहुँचने लगी है, वैसे-वैसे चाय को लेकर भी कई तरह के सवाल लोगों के मन में उठने लगे हैं। इन्हीं सवालों में से एक है—क्या ज्यादा चाय पीने से पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन लेवल कम हो सकता है?”

अगर आपने भी सोशल मीडिया, यूट्यूब पर मौजूद वीडियो या किसी ब्लॉग में यह दावा पढ़ा या सुना है कि चाय पीने से पुरुषों के हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं या टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होने लगता है, तो स्वाभाविक है कि आपके मन में भी इसे लेकर चिंता पैदा हुई होगी। आखिरकार, टेस्टोस्टेरोन पुरुषों के शरीर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हार्मोन है। यह मांसपेशियों की मजबूती, हड्डियों के स्वास्थ्य, ऊर्जा के स्तर, यौन इच्छा, शुक्राणु निर्माण, मनोदशा और शरीर की कई अन्य महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाता है। इसलिए जब किसी चीज़ का संबंध टेस्टोस्टेरोन से जोड़ा जाता है, तो लोग स्वाभाविक रूप से उसे गंभीरता से लेने लगते हैं।

यहीं से भ्रम की शुरुआत होती है। कुछ लोगों का मानना है कि चाय में मौजूद कैफीन टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम कर सकता है। वहीं, कुछ लोग दावा करते हैं कि ग्रीन टी में पाए जाने वाले प्राकृतिक यौगिक पुरुषों के टेस्टोस्टेरोन सहित अन्य हार्मोनों को प्रभावित कर सकते हैं। दूसरी ओर, कई विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य मात्रा में चाय पीने से इस प्रकार का कोई स्पष्ट नुकसान नहीं होता। ऐसे में आम व्यक्ति के लिए यह समझना आसान नहीं होता कि सच्चाई आखिर क्या है।

दरअसल, इस सवाल का जवाब केवल “हाँ” या “नहीं” में देना उचित नहीं होगा। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि अब तक किए गए वैज्ञानिक अध्ययनों से कोई एक समान निष्कर्ष सामने नहीं आया है। प्रयोगशाला और पशु-आधारित कुछ अध्ययनों में निश्चित प्रभाव देखे गए हैं, लेकिन जब वास्तविक लोगों पर किए गए क्लिनिकल अध्ययनों की बात आती है, तो तस्वीर काफी अलग दिखाई देती है। यही कारण है कि डॉक्टर और वैज्ञानिक किसी एक अध्ययन के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकालते कि चाय सीधे टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम कर देती है।

इसके अलावा यह समझना भी जरूरी है कि केवल चाय पीने से किसी व्यक्ति का टेस्टोस्टेरोन स्तर कम या अधिक नहीं हो जाता। किसी पुरुष के हार्मोन स्तर को उसकी उम्र, नींद की गुणवत्ता, तनाव, शरीर का वजन, खान-पान, शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान, शराब का सेवन, कुछ दवाइयाँ तथा विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएँ भी गहराई से प्रभावित करती हैं। इसलिए यदि कोई व्यक्ति केवल चाय को ही टेस्टोस्टेरोन कम होने का कारण मान ले, तो यह अधूरी और भ्रामक समझ होगी।

इसी वजह से इस लेख में हम केवल सुनी-सुनाई बातों या इंटरनेट पर वायरल दावों पर भरोसा नहीं करेंगे। इसके बजाय हम उन वैज्ञानिक अध्ययनों को विस्तार से समझेंगे, जिन्हें प्रतिष्ठित संस्थानों और शोधकर्ताओं ने इस विषय पर किया है। हम जानेंगे कि विभिन्न अध्ययनों में क्या निष्कर्ष सामने आए, किन लोगों को उनमें शामिल किया गया, उनकी शोध-पद्धति क्या थी और अंत में वैज्ञानिकों ने क्या निष्कर्ष निकाला। इससे आपको यह समझने में आसानी होगी कि वास्तव में अधिक मात्रा में चाय पीने और पुरुषों के टेस्टोस्टेरोन स्तर के बीच कोई स्पष्ट वैज्ञानिक संबंध है या नहीं।

तो आइए, सबसे पहले उन प्रमुख वैज्ञानिक अध्ययनों को विस्तार से समझते हैं, जिन्होंने इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई है। 

इस विषय पर अब तक हुए वैज्ञानिक शोध क्या कहते हैं?

जब किसी स्वास्थ्य संबंधी विषय पर अलग-अलग तरह के दावे किए जाते हैं, तो सबसे भरोसेमंद तरीका वैज्ञानिक शोधों का विश्लेषण करना होता है। “क्या ज्यादा चाय पीने से पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन कम हो सकता है?” इस विषय पर भी पिछले कई वर्षों में अनेक वैज्ञानिक अध्ययन किए गए हैं। हालांकि, इन सभी अध्ययनों के निष्कर्ष एक जैसे नहीं रहे हैं। कुछ अध्ययन प्रयोगशाला (Laboratory) में किए गए, कुछ पशुओं पर और कुछ वास्तविक लोगों पर किए गए।

इसी कारण प्रत्येक अध्ययन को उसके संदर्भ और सीमाओं के साथ समझना आवश्यक है। आइए, अब एक-एक करके इस विषय पर हुए प्रमुख वैज्ञानिक अध्ययनों पर नज़र डालते हैं।

शोध 1: ग्रीन टी के तत्व टेस्टोस्टेरोन के मेटाबॉलिज्म को कैसे प्रभावित करते हैं?

इस विषय पर सबसे चर्चित अध्ययनों में से एक वर्ष 2012 में प्रकाशित हुआ था। यह शोध Steroids नामक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जर्नल में प्रकाशित हुआ था। इस अध्ययन का उद्देश्य यह समझना था कि ग्रीन टी और व्हाइट टी में पाए जाने वाले कैटेचिन (Catechins) शरीर में टेस्टोस्टेरोन के चयापचय (Metabolism) की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं या नहीं।

इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने सीधे मनुष्यों पर परीक्षण नहीं किया। इसके बजाय उन्होंने प्रयोगशाला में मानव शरीर में पाए जाने वाले UGT2B17 एंजाइम का अध्ययन किया। यह एंजाइम टेस्टोस्टेरोन को ग्लूकुरोनाइड में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से शरीर अतिरिक्त टेस्टोस्टेरोन को बाहर निकालता है।

शोधकर्ताओं ने अलग-अलग प्रकार की चाय और उनमें मौजूद प्रमुख कैटेचिन, विशेष रूप से EGCG (Epigallocatechin Gallate), को इस एंजाइम के साथ मिलाकर एंजाइम की गतिविधि पर उनके प्रभाव का परीक्षण किया।

अध्ययन में पाया गया कि ग्रीन टी और व्हाइट टी में मौजूद कुछ कैटेचिन इस एंजाइम की गतिविधि को कम कर सकते हैं। इसका अर्थ यह था कि प्रयोगशाला की परिस्थितियों में टेस्टोस्टेरोन का चयापचय कुछ हद तक धीमा पड़ सकता है।

हालांकि, इस अध्ययन की सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि स्वयं शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह केवल इन-विट्रो (In Vitro) अर्थात प्रयोगशाला आधारित अध्ययन था। इसलिए इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सामान्य व्यक्ति द्वारा नियमित रूप से पी जाने वाली चाय वास्तव में शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ाती या घटाती है। वास्तविक जीवन में शरीर में चाय के अवशोषण, उसके चयापचय, यकृत (Liver) की कार्यप्रणाली तथा अन्य हार्मोनल प्रक्रियाएँ कहीं अधिक जटिल होती हैं। इसलिए केवल इस अध्ययन के आधार पर किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुँचना वैज्ञानिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता है।

शोध 2: कैफीन और पुरुषों के प्रजनन हार्मोन पर अध्ययन

बाद के वर्षों में वैज्ञानिकों का ध्यान चाय के प्रमुख घटक कैफीन की ओर भी गया। चूंकि चाय और कॉफी दोनों में कैफीन पाया जाता है, इसलिए यह जानना आवश्यक था कि क्या कैफीन स्वयं टेस्टोस्टेरोन के स्तर को प्रभावित करता है।

इस विषय पर कई जनसंख्या-आधारित (Population-based) अध्ययनों का विश्लेषण किया गया। इनमें हजारों पुरुषों के खान-पान, कैफीन सेवन और हार्मोन स्तरों की तुलना की गई।

इन अध्ययनों में एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह सामने आया कि 2,500 से अधिक पुरुषों पर किए गए एक बड़े अध्ययन में कैफीन सेवन और टेस्टोस्टेरोन के स्तर के बीच कोई स्पष्ट या सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण संबंध नहीं पाया गया। वहीं, कुछ अन्य अध्ययनों में हल्का सकारात्मक संबंध देखा गया, अर्थात अधिक कैफीन का सेवन करने वाले कुछ लोगों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर अपेक्षाकृत अधिक पाया गया। हालांकि, यह परिणाम सभी अध्ययनों में एक समान नहीं था।

वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल किसी व्यक्ति के चाय या कैफीन सेवन के आधार पर उसके टेस्टोस्टेरोन स्तर के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। किसी व्यक्ति की उम्र, वजन, नियमित व्यायाम, धूम्रपान, शराब का सेवन, नींद की गुणवत्ता और संपूर्ण जीवनशैली भी हार्मोन स्तरों को प्रभावित करती है। इसलिए केवल कैफीन को टेस्टोस्टेरोन में होने वाले बदलावों के लिए जिम्मेदार ठहराना वैज्ञानिक दृष्टि से सही नहीं माना जा सकता है।

शोध 3: पशुओं पर किए गए प्रयोगों में क्या मिला?

इस विषय को और बेहतर ढंग से समझने के लिए कई वैज्ञानिकों ने चूहों और अन्य प्रयोगशाला पशुओं पर भी अध्ययन किए।

इन अध्ययनों में कुछ शोधों से पता चला कि यदि जानवरों को सामान्य आहार की तुलना में बहुत अधिक मात्रा में ग्रीन टी एक्सट्रैक्ट या शुद्ध EGCG (Epigallocatechin Gallate) दिया जाए, तो उनके टेस्टोस्टेरोन उत्पादन में कमी देखी जा सकती है।

हालांकि, यहाँ एक महत्वपूर्ण अंतर समझना आवश्यक है।

इन प्रयोगों में उपयोग की गई EGCG की मात्रा अक्सर इतनी अधिक थी, जितनी सामान्य व्यक्ति कई कप चाय पीने के बाद भी प्राप्त नहीं कर सकता। इसके अलावा, जानवरों का शरीर, उनका हार्मोन तंत्र और विभिन्न पदार्थों के प्रति उनकी जैविक प्रतिक्रिया मनुष्यों से अलग होती है।

इसी कारण वैज्ञानिक हमेशा यह सावधानी बरतने की सलाह देते हैं कि पशुओं पर प्राप्त परिणामों को सीधे मनुष्यों पर लागू नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि चिकित्सा विज्ञान में मानव क्लिनिकल ट्रायल को सबसे अधिक विश्वसनीय माना जाता है।

इन मानव अध्ययनों और वैज्ञानिक समीक्षाओं के द्वारा निकला निष्कर्ष ?

बाद के वर्षों में कई वैज्ञानिकों ने पहले से प्रकाशित अध्ययनों की व्यवस्थित समीक्षा (Systematic Review) भी की।

इन समीक्षाओं का उद्देश्य अलग-अलग अध्ययनों के परिणामों का सामूहिक विश्लेषण करके यह समझना था कि उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण समग्र रूप से किस ओर संकेत करते हैं।

इन समीक्षाओं में पाया गया कि वर्तमान समय तक ऐसा कोई मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, जिससे यह कहा जा सके कि सामान्य मात्रा में चाय पीने वाले स्वस्थ पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर स्थायी रूप से कम हो जाता है।

कुछ अध्ययनों में हल्के जैव-रासायनिक परिवर्तन अवश्य देखे गए, जबकि कई अन्य अध्ययनों में किसी भी प्रकार का महत्वपूर्ण बदलाव नहीं पाया गया। इसी कारण वैज्ञानिक समुदाय आज भी यह नहीं मानता कि सामान्य मात्रा में चाय का सेवन पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन कम होने का सिद्ध कारण है।

वैज्ञानिक इन शोधों को कैसे देखते हैं?

यदि अब तक प्रकाशित सभी प्रमुख अध्ययनों का समग्र रूप से विश्लेषण किया जाए, तो एक बात स्पष्ट रूप से सामने आती है।

प्रयोगशाला में किए गए अध्ययन यह संकेत देते हैं कि चाय में मौजूद कुछ प्राकृतिक यौगिक हार्मोन के चयापचय (Metabolism) से जुड़े एंजाइमों की गतिविधि को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं, पशुओं पर किए गए कुछ अध्ययनों में भी टेस्टोस्टेरोन उत्पादन पर प्रभाव देखा गया है। हालांकि, इन अधिकांश अध्ययनों में ग्रीन टी एक्सट्रैक्ट या EGCG की मात्रा सामान्य आहार या रोजमर्रा की चाय की तुलना में कहीं अधिक थी।

दूसरी ओर, वास्तविक पुरुषों पर किए गए अध्ययनों में अब तक ऐसा कोई लगातार और मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है, जिससे यह कहा जा सके कि सामान्य मात्रा में चाय पीने से टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो जाता है।

इसी आधार पर अधिकांश एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और पोषण विशेषज्ञ केवल इस आशंका के कारण चाय छोड़ने की सलाह नहीं देते कि इससे टेस्टोस्टेरोन कम हो जाएगा। उनका मानना है कि टेस्टोस्टेरोन के स्तर पर सबसे अधिक प्रभाव उम्र, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव, मोटापा और कुछ चिकित्सीय स्थितियों का पड़ता है। इन कारकों की तुलना में सामान्य मात्रा में चाय का प्रभाव, यदि कोई होता भी है, तो उसे वर्तमान वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर बहुत सीमित या नगण्य माना जाता है। 

निष्कर्ष

वर्तमान वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि सामान्य मात्रा में चाय पीने से पुरुषों का टेस्टोस्टेरोन स्तर कम हो जाता है। हालांकि, अत्यधिक मात्रा में ग्रीन टी एक्सट्रैक्ट या उसके कुछ घटकों पर किए गए प्रयोगशाला और पशु अध्ययनों में कुछ प्रभाव अवश्य देखे गए हैं, लेकिन ये परिणाम सामान्य चाय पीने वाले लोगों पर सीधे लागू नहीं होते। इसलिए स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद पर ध्यान देना टेस्टोस्टेरोन को स्वस्थ बनाए रखने के लिए कहीं अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

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ज्यादा चाय पीने और टेस्टोस्टेरोन से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या रोज़ 4–5 कप चाय पीने से टेस्टोस्टेरोन कम हो सकता है?

अब तक उपलब्ध वैज्ञानिक शोध यह साबित नहीं करते कि सामान्य मात्रा में रोज़ 4–5 कप चाय पीने से स्वस्थ पुरुषों का टेस्टोस्टेरोन स्तर कम हो जाता है। हालांकि, बहुत अधिक कैफीन या ग्रीन टी एक्सट्रैक्ट पर किए गए कुछ प्रयोगशाला और पशु अध्ययनों में प्रभाव देखे गए हैं, लेकिन ये परिणाम सामान्य चाय पीने वाले लोगों पर सीधे लागू नहीं किए जा सकते। यदि आपकी चाय पीने की मात्रा बहुत अधिक है, तो संतुलित सेवन करना बेहतर माना जाता है।

मैं जिम जाता हूँ और दिन में कई कप चाय पीता हूँ। क्या इससे मेरी मसल्स या टेस्टोस्टेरोन पर असर पड़ेगा?

यदि आप स्वस्थ हैं और सामान्य मात्रा में चाय पीते हैं, तो वर्तमान वैज्ञानिक प्रमाण यह नहीं बताते कि इससे टेस्टोस्टेरोन या मांसपेशियों के विकास पर कोई स्पष्ट नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मसल्स और हार्मोन के लिए पर्याप्त प्रोटीन, नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, अच्छी नींद और संतुलित आहार कहीं अधिक महत्वपूर्ण कारक हैं।

क्या ग्रीन टी ब्लैक टी या दूध वाली चाय की तुलना में टेस्टोस्टेरोन को ज्यादा प्रभावित करती है?

कुछ प्रयोगशाला अध्ययनों में ग्रीन टी के EGCG जैसे यौगिकों का हार्मोन मेटाबॉलिज्म से जुड़े एंजाइमों पर प्रभाव देखा गया है। हालांकि, वास्तविक मनुष्यों पर हुए अध्ययनों में यह साबित नहीं हुआ कि सामान्य मात्रा में ग्रीन टी पीने से टेस्टोस्टेरोन कम हो जाता है। इसलिए वर्तमान वैज्ञानिक प्रमाण किसी भी प्रकार की सामान्य चाय को टेस्टोस्टेरोन कम करने वाला नहीं मानते।

अगर मेरा टेस्टोस्टेरोन पहले से कम है, तो क्या मुझे चाय पीना बंद कर देना चाहिए?

जरूरी नहीं। यदि किसी व्यक्ति का टेस्टोस्टेरोन पहले से कम है, तो केवल चाय को इसका कारण मानना उचित नहीं होगा। कम टेस्टोस्टेरोन के पीछे उम्र, मोटापा, तनाव, नींद की कमी, कुछ दवाइयाँ और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ भी जिम्मेदार हो सकती हैं। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से जांच कराना अधिक महत्वपूर्ण है।

क्या ज्यादा कैफीन लेने से पुरुषों के हार्मोन बिगड़ सकते हैं?

बहुत अधिक मात्रा में कैफीन लेने से नींद खराब हो सकती है, चिंता बढ़ सकती है और तनाव हार्मोन प्रभावित हो सकते हैं। अप्रत्यक्ष रूप से ये स्थितियाँ हार्मोनल स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। लेकिन केवल कैफीन के कारण टेस्टोस्टेरोन कम होने का स्पष्ट वैज्ञानिक प्रमाण अभी उपलब्ध नहीं है।

क्या चाय छोड़ने से टेस्टोस्टेरोन बढ़ जाता है?

अब तक ऐसा कोई विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जो यह साबित करे कि केवल चाय छोड़ देने से टेस्टोस्टेरोन बढ़ जाता है। यदि किसी व्यक्ति का टेस्टोस्टेरोन कम है, तो उसकी जीवनशैली, खान-पान, व्यायाम, नींद और चिकित्सकीय कारणों की जांच अधिक महत्वपूर्ण होती है।

क्या दूध वाली चाय और ग्रीन टी में टेस्टोस्टेरोन पर असर अलग-अलग होता है?

उत्तर:
वर्तमान शोध यह स्पष्ट रूप से नहीं बताते कि दूध वाली चाय और ग्रीन टी का टेस्टोस्टेरोन पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। ग्रीन टी के कुछ यौगिकों पर प्रयोगशाला में अध्ययन हुए हैं, लेकिन सामान्य मात्रा में किसी भी प्रकार की चाय के सेवन से टेस्टोस्टेरोन कम होने का मजबूत प्रमाण नहीं मिला है।

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