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भारत में शायद ही कोई ऐसा घर होगा, जहाँ दिन की शुरुआत एक कप चाय के बिना होती हो। कई लोगों के लिए चाय केवल एक पेय नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की आदत का हिस्सा बन चुकी है। सुबह उठते ही चाय, ऑफिस में चाय, दोस्तों के साथ चाय और शाम की थकान दूर करने के लिए भी चाय। कुछ लोग दिनभर में केवल एक या दो कप चाय पीते हैं, जबकि कुछ लोगों की आदत चार, पाँच या उससे भी अधिक कप चाय पीने की होती है।
लेकिन जब चाय की मात्रा बढ़ने लगती है, तो लोगों के मन में एक सवाल भी उठने लगता है—क्या ज्यादा चाय पीने से दिल के स्वास्थ्य पर कोई असर पड़ता है? क्या अधिक चाय पीने से हृदय कमजोर हो सकता है? क्या इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है? क्या ज्यादा चाय पीने से हार्ट अटैक, अनियमित धड़कन (Arrhythmia) या अन्य हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है? या फिर चाय में मौजूद कुछ प्राकृतिक तत्व वास्तव में दिल को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं?
इन सवालों का जवाब उतना आसान नहीं है, क्योंकि चाय में केवल कैफीन ही नहीं होती, बल्कि इसमें पॉलीफेनॉल (Polyphenols), कैटेचिन (Catechins), फ्लेवोनॉयड्स (Flavonoids) और कई शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये तत्व शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन (Inflammation) को कम करने में मदद कर सकते हैं, जो हृदय रोगों के प्रमुख जोखिम कारकों में से हैं। दूसरी ओर, चाय में मौजूद कैफीन कुछ लोगों में थोड़े समय के लिए ब्लड प्रेशर और हृदय गति को बढ़ा सकती है, विशेषकर उन लोगों में जो कैफीन का नियमित सेवन नहीं करते।
इसी कारण पिछले कई दशकों में दुनिया के अनेक देशों में इस विषय पर बड़े स्तर पर वैज्ञानिक अध्ययन किए गए हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, जापान और यूरोप के शोधकर्ताओं ने लाखों लोगों पर लंबे समय तक अध्ययन करके यह समझने की कोशिश की कि चाय का नियमित और अधिक सेवन वास्तव में हृदय के लिए लाभदायक है या नुकसानदायक। इन अध्ययनों में केवल ब्लड प्रेशर ही नहीं, बल्कि हार्ट अटैक, स्ट्रोक, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हृदय की धड़कन की अनियमितता और समय से पहले मृत्यु जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं का भी मूल्यांकन किया गया।
हालांकि, इन सभी शोधों का एक समान निष्कर्ष नहीं है। कुछ अध्ययनों में सीमित मात्रा में बिना अधिक चीनी वाली चाय को हृदय के लिए लाभकारी बताया गया है, जबकि कुछ शोध यह संकेत देते हैं कि अत्यधिक कैफीन या बहुत अधिक मात्रा में चाय का सेवन कुछ लोगों—विशेष रूप से उच्च रक्तचाप, हृदय की धड़कन संबंधी समस्या या कैफीन के प्रति संवेदनशील व्यक्तियों—के लिए समस्याएँ पैदा कर सकता है। इसलिए केवल यह कहना कि “चाय हमेशा अच्छी है” या “चाय हमेशा नुकसान करती है”, वैज्ञानिक दृष्टि से सही नहीं होगा।
इस लेख में हम केवल सुनी-सुनाई बातों पर नहीं, बल्कि दुनिया की प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थाओं और वैज्ञानिक जर्नलों में प्रकाशित शोधों के आधार पर विस्तार से समझेंगे कि अब तक इस विषय पर क्या-क्या अध्ययन हुए हैं, किन वैज्ञानिकों ने ये शोध किए, उन्होंने किस प्रकार अध्ययन किया और उनके निष्कर्ष क्या बताते हैं। अंत में हम यह भी जानेंगे कि एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए प्रतिदिन कितनी चाय पीना सामान्य माना जाता है और किन लोगों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
इस विषय पर अब तक हुए वैज्ञानिक शोध क्या कहते हैं?
जब भी यह सवाल उठता है कि क्या ज्यादा चाय पीने से दिल के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है, तो इसका सही उत्तर केवल वैज्ञानिक शोध ही दे सकते हैं। पिछले लगभग 25 वर्षों में अमेरिका, चीन, जापान, यूरोप और अन्य देशों के वैज्ञानिकों ने लाखों लोगों पर अध्ययन करके यह समझने का प्रयास किया कि नियमित रूप से चाय पीने का हृदय पर क्या प्रभाव पड़ता है।
दिलचस्प बात यह है कि अधिकांश शोधों में केवल यह नहीं देखा गया कि लोग चाय पीते हैं या नहीं, बल्कि यह भी अध्ययन किया गया कि वे प्रतिदिन कितने कप चाय पीते हैं, कितने वर्षों से पी रहे हैं, उन्हें पहले से हृदय रोग है या नहीं, उनका खान-पान कैसा है और उनकी जीवनशैली कैसी है। इसके बाद ही परिणामों का विश्लेषण किया गया।
शोध 1: वर्ष 2001 – यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलाइना (अमेरिका)
जब चाय और हृदय स्वास्थ्य के संबंध पर दुनिया भर में अलग-अलग तरह के दावे किए जा रहे थे, तब वैज्ञानिकों ने यह समझने की कोशिश की कि इस विषय पर अब तक हुए सभी प्रमुख शोध वास्तव में क्या संकेत देते हैं। इसी उद्देश्य से वर्ष 2001 में अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलाइना से जुड़े शोधकर्ताओं डॉ. Ulrike Peters, डॉ. Charles Poole और डॉ. Lenore Arab ने इस विषय पर उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों का व्यापक विश्लेषण किया। उन्होंने केवल एक नए अध्ययन पर निर्भर रहने के बजाय पहले से प्रकाशित कई बड़े शोधों को एक साथ जोड़कर उनका मूल्यांकन किया, जिसे Meta-analysis कहा जाता है।
इस Meta-analysis में कुल 17 प्रमुख वैज्ञानिक अध्ययनों को शामिल किया गया था। इनमें 10 Cohort Studies और 7 Case-Control Studies थीं। Cohort Studies में लोगों के एक बड़े समूह का कई वर्षों तक अनुसरण किया जाता है ताकि यह समझा जा सके कि उनकी जीवनशैली, खान-पान और अन्य आदतों का भविष्य में उनके स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है। वहीं Case-Control Studies में पहले से हृदय रोग से पीड़ित लोगों की तुलना स्वस्थ लोगों से की जाती है, जिससे यह पता लगाने का प्रयास किया जाता है कि किन आदतों या कारकों का बीमारी से संबंध हो सकता है।
इन सभी अध्ययनों का विश्लेषण करते समय शोधकर्ताओं ने विशेष रूप से यह जानने की कोशिश की कि नियमित रूप से चाय पीने का संबंध हार्ट अटैक (Myocardial Infarction), कोरोनरी हार्ट डिजीज (Coronary Heart Disease) और स्ट्रोक (Stroke) जैसी गंभीर हृदय संबंधी समस्याओं से किस प्रकार जुड़ा हुआ है। चूंकि इस विश्लेषण में अलग-अलग देशों और विभिन्न आबादी पर किए गए शोध शामिल थे, इसलिए वैज्ञानिकों को व्यापक स्तर पर उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन करने का अवसर मिला।
विश्लेषण के परिणामों से यह संकेत मिला कि जो लोग प्रतिदिन औसतन लगभग 3 कप चाय पीते थे, उनमें हार्ट अटैक का जोखिम उन लोगों की तुलना में लगभग 11% कम पाया गया जो बहुत कम या बिल्कुल चाय नहीं पीते थे। यह निष्कर्ष इस संभावना की ओर संकेत करता है कि चाय में मौजूद प्राकृतिक पॉलीफेनॉल (Polyphenols) और अन्य एंटीऑक्सीडेंट हृदय स्वास्थ्य पर लाभकारी प्रभाव डाल सकते हैं। हालांकि यह अध्ययन यह सिद्ध नहीं करता कि केवल चाय पीने से ही हृदय रोग का खतरा कम हो जाता है, क्योंकि हृदय स्वास्थ्य पर व्यक्ति की पूरी जीवनशैली, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान की आदत, वजन और अन्य कई कारकों का भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
शोधकर्ताओं ने एक और महत्वपूर्ण बात पर विशेष जोर दिया। उन्होंने पाया कि अलग-अलग देशों और आबादी में किए गए सभी अध्ययनों के परिणाम पूरी तरह एक जैसे नहीं थे। कुछ शोधों में चाय के संभावित लाभ अधिक स्पष्ट दिखाई दिए, जबकि कुछ में यह संबंध अपेक्षाकृत कमजोर या स्पष्ट नहीं था। इसके पीछे लोगों की जीवनशैली, चाय के प्रकार, उसे बनाने के तरीके, पीने की मात्रा तथा अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारकों में अंतर जैसी कई संभावित वजहें हो सकती हैं।
इसी कारण शोधकर्ताओं ने अपने निष्कर्ष में यह स्पष्ट रूप से लिखा कि उस समय उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण चाय और हृदय स्वास्थ्य के बीच संभावित लाभकारी संबंध की ओर संकेत तो करते हैं, लेकिन इस संबंध को पूरी तरह निश्चित रूप से स्थापित करने के लिए भविष्य में और अधिक बड़े, उच्च गुणवत्ता वाले तथा लंबे समय तक चलने वाले वैज्ञानिक अध्ययनों की आवश्यकता है। इसलिए इस Meta-analysis को चाय और हृदय स्वास्थ्य पर आगे हुए अनेक महत्वपूर्ण शोधों की एक मजबूत वैज्ञानिक नींव माना जाता है।
शोध 2: वर्ष 2015 – शंघाई सेवन्थ पीपुल्स हॉस्पिटल, चीन
वर्ष 2001 के बाद चाय और हृदय स्वास्थ्य के संबंध पर दुनिया के अलग-अलग देशों में कई नए वैज्ञानिक अध्ययन प्रकाशित हुए। इन अध्ययनों से काफी उपयोगी जानकारी मिली, लेकिन उनके परिणाम पूरी तरह एक जैसे नहीं थे। कुछ शोधों में चाय के स्पष्ट लाभ दिखाई दिए, जबकि कुछ में यह संबंध अपेक्षाकृत कम मजबूत था। ऐसे में वैज्ञानिकों ने यह आवश्यकता महसूस की कि अब तक उपलब्ध सभी उच्च गुणवत्ता वाले अध्ययनों को एक साथ जोड़कर दोबारा विश्लेषण किया जाए, ताकि अधिक भरोसेमंद निष्कर्ष निकाले जा सकें।
इसी उद्देश्य से वर्ष 2015 में शंघाई सेवन्थ पीपुल्स हॉस्पिटल (चीन) के डॉ. Chi Zhang और उनके सहयोगियों ने इस विषय पर एक व्यापक Meta-analysis प्रकाशित किया। उस समय यह चाय और हृदय स्वास्थ्य के संबंध पर किए गए सबसे बड़े विश्लेषणों में से एक माना गया। इसका उद्देश्य केवल यह जानना नहीं था कि चाय पीने से हार्ट अटैक का जोखिम कम होता है या नहीं, बल्कि यह समझना भी था कि नियमित रूप से चाय पीने का विभिन्न गंभीर हृदय संबंधी बीमारियों और मृत्यु दर से क्या संबंध हो सकता है।
इस Meta-analysis में दुनिया के विभिन्न देशों में किए गए 22 Prospective Studies को शामिल किया गया। इन अध्ययनों में कुल 8,56,206 प्रतिभागियों के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। Prospective Studies की विशेषता यह होती है कि इनमें लोगों के एक बड़े समूह का कई वर्षों तक लगातार अनुसरण किया जाता है। इस दौरान उनकी खान-पान की आदतों, जीवनशैली और स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों को रिकॉर्ड किया जाता है। इसी कारण इस प्रकार के अध्ययन किसी आदत और बीमारी के बीच संभावित संबंध को समझने के लिए अपेक्षाकृत अधिक विश्वसनीय माने जाते हैं।
शोधकर्ताओं ने विशेष रूप से यह मूल्यांकन किया कि नियमित रूप से चाय पीने का संबंध कोरोनरी हार्ट डिजीज (Coronary Heart Disease), स्ट्रोक (Stroke), कार्डियक डेथ (Cardiac Death) और कुल मृत्यु दर (All-cause Mortality) से किस प्रकार जुड़ा हुआ है। इसके लिए उन्होंने सभी अध्ययनों के परिणामों की आपस में तुलना की और यह समझने का प्रयास किया कि अलग-अलग आबादी में चाय का प्रभाव किस सीमा तक समान दिखाई देता है।
विश्लेषण के दौरान एक महत्वपूर्ण पैटर्न सामने आया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों की दैनिक चाय की मात्रा औसतन लगभग 3 अतिरिक्त कप अधिक थी, उनमें कई गंभीर हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम अपेक्षाकृत कम देखा गया। इनमें सबसे पहले कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा कम पाया गया, जो हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों के संकुचित या अवरुद्ध होने से जुड़ी एक गंभीर स्थिति है। इसके साथ ही स्ट्रोक का जोखिम भी कम देखा गया, जो मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बाधित होने के कारण होने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्या है।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि नियमित रूप से चाय पीने वाले लोगों में कार्डियक डेथ, अर्थात हृदय संबंधी कारणों से होने वाली मृत्यु का जोखिम अपेक्षाकृत कम था। इतना ही नहीं, शोधकर्ताओं ने All-cause Mortality, यानी किसी भी कारण से होने वाली कुल मृत्यु दर में भी कमी का संबंध नियमित चाय सेवन के साथ देखा। इसका अर्थ यह नहीं है कि केवल चाय पीने से व्यक्ति की आयु बढ़ जाती है, बल्कि यह संकेत मिलता है कि संतुलित जीवनशैली का हिस्सा बनने पर चाय हृदय स्वास्थ्य को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने वाले कारकों में से एक हो सकती है।
शोधकर्ताओं ने इन संभावित लाभों के पीछे मौजूद जैविक कारणों को भी समझाने का प्रयास किया। उनके अनुसार, चाय में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले पॉलीफेनॉल (Polyphenols) और फ्लेवोनॉयड्स (Flavonoids) शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट यौगिक होते हैं। ये शरीर में बनने वाले ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (Oxidative Stress) को कम करने, रक्त वाहिकाओं की भीतरी परत (Endothelium) की कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने और शरीर में होने वाली दीर्घकालिक सूजन (Chronic Inflammation) को नियंत्रित करने में योगदान दे सकते हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिकों का मानना है कि नियमित और संतुलित मात्रा में चाय का सेवन हृदय एवं रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी भूमिका निभा सकता है।
हालांकि, शोधकर्ताओं ने अपने निष्कर्ष में यह भी स्पष्ट किया कि यह अध्ययन चाय और बेहतर हृदय स्वास्थ्य के बीच एक संबंध (Association) को दर्शाता है, लेकिन यह निश्चित रूप से यह सिद्ध नहीं करता कि केवल चाय पीना ही इन लाभों का कारण है। हृदय स्वास्थ्य पर व्यक्ति का संपूर्ण आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान की आदत, शराब का सेवन, वजन, तनाव और अन्य जीवनशैली संबंधी कारकों का भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। इसलिए चाय को एक स्वस्थ जीवनशैली का पूरक माना जा सकता है, न कि हृदय रोगों से बचाव का एकमात्र उपाय।
शोध 3: वर्ष 2020 – Dose–Response Meta-analysis
वर्ष 2015 तक प्रकाशित कई बड़े अध्ययनों से यह संकेत मिलने लगा था कि नियमित रूप से चाय पीने वाले लोगों में हृदय रोग का जोखिम अपेक्षाकृत कम हो सकता है। लेकिन वैज्ञानिकों के सामने एक महत्वपूर्ण प्रश्न अभी भी बना हुआ था—क्या चाय की मात्रा बढ़ने के साथ यह संभावित लाभ भी बढ़ता है, या फिर एक निश्चित मात्रा के बाद इसका प्रभाव स्थिर हो जाता है? इसी प्रश्न का उत्तर खोजने के लिए वर्ष 2020 में एक व्यापक Systematic Review और Dose–Response Meta-analysis प्रकाशित किया गया।
इस अध्ययन की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसमें केवल यह नहीं देखा गया कि चाय पीने वाले और चाय न पीने वाले लोगों के बीच क्या अंतर है, बल्कि यह भी विश्लेषण किया गया कि चाय की मात्रा में प्रत्येक अतिरिक्त कप बढ़ने पर हृदय स्वास्थ्य से जुड़े जोखिम किस प्रकार बदलते हैं। वैज्ञानिक भाषा में इसे Dose–Response Analysis कहा जाता है, क्योंकि इसमें किसी खाद्य पदार्थ या पेय की मात्रा (Dose) और उसके संभावित प्रभाव (Response) के बीच संबंध का मूल्यांकन किया जाता है।
इस व्यापक विश्लेषण में दुनिया के विभिन्न देशों में किए गए 39 Prospective Cohort Studies को शामिल किया गया। इन अध्ययनों में लाखों लोगों के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का कई वर्षों तक अनुसरण किया गया था। प्रतिभागियों की चाय पीने की आदतों, जीवनशैली और समय के साथ विकसित होने वाली हृदय संबंधी बीमारियों का रिकॉर्ड रखा गया, जिससे शोधकर्ताओं को लंबे समय में चाय और हृदय स्वास्थ्य के बीच संभावित संबंध को अधिक विश्वसनीय तरीके से समझने का अवसर मिला।
सभी अध्ययनों के संयुक्त विश्लेषण के बाद शोधकर्ताओं ने एक दिलचस्प प्रवृत्ति देखी। उन्होंने पाया कि प्रतिदिन चाय का प्रत्येक अतिरिक्त कप पीने के साथ हृदय रोगों से होने वाली मृत्यु (Cardiovascular Mortality) का जोखिम औसतन लगभग 4% कम देखा गया। यह निष्कर्ष इस संभावना की ओर संकेत करता है कि नियमित और संतुलित मात्रा में चाय का सेवन हृदय स्वास्थ्य के लिए सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।
इसी प्रकार, अध्ययन में यह भी पाया गया कि प्रतिदिन एक अतिरिक्त कप चाय पीने के साथ स्ट्रोक (Stroke) का जोखिम भी औसतन लगभग 4% कम देखा गया। स्ट्रोक ऐसी गंभीर स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह बाधित हो जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यदि चाय में मौजूद जैव सक्रिय तत्व रक्त वाहिकाओं की कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने और सूजन को कम करने में मदद करते हैं, तो यह प्रभाव स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में भी योगदान दे सकता है।
इसके अतिरिक्त, जब सभी प्रकार की हृदय संबंधी घटनाओं (Cardiovascular Events)—जैसे हार्ट अटैक, कोरोनरी हार्ट डिजीज और अन्य गंभीर हृदय समस्याओं—का संयुक्त रूप से मूल्यांकन किया गया, तो उनमें भी जोखिम में हल्की लेकिन सकारात्मक कमी देखने को मिली। हालांकि यह कमी बहुत अधिक नहीं थी, फिर भी सभी अध्ययनों के संयुक्त परिणाम एक समान दिशा में संकेत कर रहे थे कि नियमित चाय सेवन का संबंध बेहतर हृदय स्वास्थ्य से हो सकता है।
शोधकर्ताओं ने इन संभावित लाभों के पीछे मौजूद जैविक कारणों पर भी चर्चा की। उनके अनुसार, चाय में पाए जाने वाले पॉलीफेनॉल (Polyphenols), कैटेचिन (Catechins) और फ्लेवोनॉयड्स (Flavonoids) जैसे प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट शरीर में होने वाले ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने, रक्त वाहिकाओं की भीतरी परत (Endothelium) की कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने तथा दीर्घकालिक सूजन (Chronic Inflammation) को नियंत्रित करने में योगदान दे सकते हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिक इन यौगिकों को चाय के संभावित हृदय-रक्षक प्रभावों का एक महत्वपूर्ण आधार मानते हैं।
हालांकि, शोधकर्ताओं ने अपने निष्कर्ष में एक महत्वपूर्ण सावधानी भी स्पष्ट रूप से बताई। उन्होंने कहा कि यह एक Observational Analysis था, जिसमें लोगों की वास्तविक जीवनशैली और उनकी स्वास्थ्य संबंधी आदतों का अवलोकन किया गया था। इसलिए इस अध्ययन से केवल संबंध (Association) का पता चलता है, न कि कारण और परिणाम (Cause-and-Effect) का। दूसरे शब्दों में, यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि केवल चाय पीने से ही हृदय रोग का जोखिम कम हो जाता है। संभव है कि नियमित चाय पीने वाले लोग अन्य स्वस्थ आदतों—जैसे संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, धूम्रपान से दूरी और बेहतर जीवनशैली—का भी पालन करते हों, जिनका सकारात्मक प्रभाव परिणामों में दिखाई दिया हो।
इसी कारण वैज्ञानिकों ने सलाह दी कि चाय को हृदय रोगों की रोकथाम का एकमात्र उपाय नहीं माना जाना चाहिए। बल्कि इसे एक संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली के साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए। जब ये सभी कारक एक साथ काम करते हैं, तभी हृदय स्वास्थ्य को लंबे समय तक बेहतर बनाए रखने में वास्तविक लाभ मिलने की संभावना अधिक होती है।
शोध 4: चीन-PAR (China-PAR) प्रोजेक्ट
चाय और हृदय स्वास्थ्य के संबंध पर वर्षों से कई वैज्ञानिक अध्ययन प्रकाशित होते रहे हैं। इनमें कुछ अध्ययनों ने संभावित लाभों के संकेत दिए, जबकि कुछ ने यह सुझाव दिया कि इस संबंध को और गहराई से समझने की आवश्यकता है। इसी दिशा में चीन में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़े स्तर का शोध किया गया, जिसे China-PAR (Prediction for Atherosclerotic Cardiovascular Disease Risk in China) Project के नाम से जाना जाता है। यह अध्ययन इसलिए विशेष माना जाता है क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में प्रतिभागियों को लंबे समय तक फॉलो करके वास्तविक जीवन में चाय पीने की आदत और हृदय स्वास्थ्य के बीच संबंध का मूल्यांकन किया गया।
इस Prospective Cohort Study में लगभग 1 लाख से अधिक वयस्कों को शामिल किया गया। शोध की शुरुआत में प्रतिभागियों की जीवनशैली, खान-पान की आदतें, चाय पीने की आवृत्ति, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधि, रक्तचाप, मधुमेह और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां दर्ज की गईं। इसके बाद कई वर्षों तक उनके स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखी गई, ताकि यह समझा जा सके कि नियमित चाय पीने का लंबे समय में हृदय संबंधी बीमारियों और मृत्यु के जोखिम से कोई संबंध है या नहीं।
जब शोधकर्ताओं ने सभी आंकड़ों का विश्लेषण किया, तो उन्होंने पाया कि जो लोग नियमित रूप से चाय का सेवन करते थे, उनमें Atherosclerotic Cardiovascular Disease (ASCVD) का जोखिम अपेक्षाकृत कम था। यह ऐसी स्थिति है जिसमें धमनियों के भीतर वसा, कोलेस्ट्रॉल और अन्य पदार्थ जमा होकर प्लाक (Plaque) बना लेते हैं। समय के साथ यह प्लाक धमनियों को संकरा कर देता है, जिससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य गंभीर हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। अध्ययन के परिणामों से संकेत मिला कि नियमित चाय पीने वालों में इस प्रकार की बीमारियों का जोखिम तुलनात्मक रूप से कम देखा गया।
अध्ययन में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई। शोधकर्ताओं ने पाया कि नियमित रूप से चाय पीने वाले लोगों में हृदय रोगों के कारण होने वाली मृत्यु (Cardiovascular Death) की संभावना भी अपेक्षाकृत कम थी। इसके अलावा, जब किसी भी कारण से होने वाली कुल मृत्यु दर (All-cause Mortality) का मूल्यांकन किया गया, तब भी चाय का नियमित सेवन करने वाले लोगों में यह जोखिम कम पाया गया। इन परिणामों ने यह संकेत दिया कि चाय का नियमित और संतुलित सेवन केवल हृदय रोगों तक ही सीमित नहीं हो सकता, बल्कि समग्र स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव से जुड़ा हो सकता है।
इस अध्ययन का एक विशेष निष्कर्ष यह भी था कि जो लोग नियमित रूप से चाय पीते थे, वे 50 वर्ष की आयु के बाद औसतन अधिक समय तक गंभीर हृदय रोगों से मुक्त रह सकते हैं। दूसरे शब्दों में, उनके Cardiovascular Disease-Free Life Expectancy यानी हृदय रोगों के बिना स्वस्थ जीवन जीने की अवधि अपेक्षाकृत अधिक होने का अनुमान लगाया गया। यह निष्कर्ष विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि यह केवल बीमारी के जोखिम को नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनकाल (Healthy Life Expectancy) को भी ध्यान में रखता है।
शोधकर्ताओं ने इन संभावित लाभों के पीछे मौजूद वैज्ञानिक कारणों पर भी चर्चा की। उनके अनुसार, चाय में पाए जाने वाले पॉलीफेनॉल (Polyphenols), कैटेचिन (Catechins) और अन्य प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट शरीर में होने वाले ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने, रक्त वाहिकाओं की कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने, सूजन (Inflammation) को नियंत्रित करने और धमनियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में योगदान दे सकते हैं। यही जैविक प्रभाव लंबे समय में हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
हालांकि, शोधकर्ताओं ने अपने निष्कर्षों के साथ एक महत्वपूर्ण सावधानी भी स्पष्ट रूप से बताई। उन्होंने कहा कि यह एक Observational Prospective Cohort Study थी, इसलिए इससे केवल यह पता चलता है कि नियमित चाय सेवन और बेहतर हृदय स्वास्थ्य के बीच एक संबंध (Association) मौजूद है। इससे यह निश्चित रूप से सिद्ध नहीं किया जा सकता कि केवल चाय पीने की वजह से ही ये लाभ प्राप्त हुए।
उन्होंने यह भी बताया कि नियमित चाय पीने वाले लोग अक्सर अन्य स्वस्थ आदतों का भी पालन करते हैं। उदाहरण के लिए, वे संतुलित आहार लेते हैं, नियमित व्यायाम करते हैं, धूम्रपान से बचते हैं, पर्याप्त नींद लेते हैं और अपने संपूर्ण स्वास्थ्य का बेहतर ध्यान रखते हैं। इन सभी कारकों का भी हृदय स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। इसलिए वैज्ञानिकों का निष्कर्ष यही था कि चाय को किसी चमत्कारी उपाय के रूप में नहीं, बल्कि एक संतुलित और स्वस्थ जीवनशैली के पूरक (Part of a Healthy Lifestyle) के रूप में देखा जाना चाहिए। जब नियमित चाय सेवन के साथ स्वस्थ भोजन, शारीरिक गतिविधि और अन्य अच्छी आदतें भी जुड़ती हैं, तभी हृदय स्वास्थ्य को लंबे समय तक बेहतर बनाए रखने की संभावना अधिक होती है।
शोध 5: वर्ष 2024 – वैश्विक Meta-analysis
चाय और हृदय स्वास्थ्य के संबंध पर पिछले दो दशकों में अनेक बड़े वैज्ञानिक अध्ययन प्रकाशित हो चुके हैं। इन अध्ययनों से लगातार यह संकेत मिलता रहा कि नियमित और संतुलित मात्रा में चाय का सेवन हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है। हालांकि समय के साथ नए शोध सामने आते रहे और अलग-अलग देशों की आबादी से अधिक आंकड़े उपलब्ध होते गए। इसी कारण वैज्ञानिकों ने उपलब्ध नवीनतम प्रमाणों को एक साथ जोड़कर यह समझने का प्रयास किया कि वर्तमान समय में इस विषय पर सबसे मजबूत वैज्ञानिक निष्कर्ष क्या हैं।
इसी उद्देश्य से वर्ष 2024 में एक व्यापक वैश्विक Meta-analysis प्रकाशित किया गया। यह इस विषय पर अब तक किए गए सबसे बड़े विश्लेषणों में से एक था। इस अध्ययन में दुनिया के विभिन्न देशों में किए गए 38 Prospective Cohort Data Sets को शामिल किया गया, जिनमें लगभग 19.5 लाख (1.95 Million) प्रतिभागियों के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इतनी बड़ी संख्या में प्रतिभागियों को शामिल किए जाने के कारण इस अध्ययन के निष्कर्षों को वैज्ञानिक समुदाय में विशेष महत्व दिया गया, क्योंकि बड़ी आबादी से प्राप्त आंकड़े किसी संभावित संबंध को अधिक स्पष्ट रूप से समझने में मदद करते हैं।
शोधकर्ताओं ने इन सभी अध्ययनों का संयुक्त विश्लेषण करके यह मूल्यांकन किया कि नियमित रूप से अधिक मात्रा में चाय पीने का संबंध हृदय रोगों से होने वाली मृत्यु (Cardiovascular Disease Mortality), सभी कारणों से होने वाली मृत्यु (All-cause Mortality) तथा अन्य प्रमुख स्वास्थ्य परिणामों से किस प्रकार जुड़ा हुआ है। इसके लिए अलग-अलग देशों, आयु वर्गों और जीवनशैली वाले लोगों के आंकड़ों की तुलना की गई, ताकि निष्कर्ष किसी एक विशेष आबादी तक सीमित न रहें।
विश्लेषण के परिणामों से पता चला कि जो लोग नियमित रूप से चाय का सेवन करते थे, उनमें Cardiovascular Disease के कारण होने वाली मृत्यु का जोखिम अपेक्षाकृत कम पाया गया। यह निष्कर्ष पहले प्रकाशित कई बड़े अध्ययनों के अनुरूप था, जिनमें भी चाय और बेहतर हृदय स्वास्थ्य के बीच सकारात्मक संबंध देखने को मिला था। इससे यह संकेत और मजबूत हुआ कि नियमित चाय सेवन हृदय एवं रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक भूमिका निभा सकता है।
इसके अलावा, शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि नियमित चाय पीने वाले लोगों में All-cause Mortality, अर्थात किसी भी कारण से होने वाली कुल मृत्यु का जोखिम भी तुलनात्मक रूप से कम था। इसका अर्थ यह नहीं है कि केवल चाय पीने से व्यक्ति की आयु निश्चित रूप से बढ़ जाती है, बल्कि यह संकेत देता है कि जिन लोगों की जीवनशैली में नियमित चाय का सेवन शामिल था, उनमें समग्र स्वास्थ्य परिणाम अपेक्षाकृत बेहतर देखे गए।
हालांकि, जब शोधकर्ताओं ने कैंसर से होने वाली मृत्यु (Cancer Mortality) के आंकड़ों का विश्लेषण किया, तो उन्हें इस संबंध में पर्याप्त और स्पष्ट वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिले। कुछ अध्ययनों में संभावित लाभ दिखाई दिए, जबकि अन्य में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया। इसलिए इस Meta-analysis के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सका कि नियमित चाय का सेवन कैंसर से मृत्यु के जोखिम को निश्चित रूप से कम करता है। वैज्ञानिकों ने इस विषय पर भविष्य में और अधिक उच्च गुणवत्ता वाले शोध किए जाने की आवश्यकता भी बताई।
शोधकर्ताओं ने इन संभावित लाभों के पीछे मौजूद जैविक कारणों पर भी चर्चा की। उनके अनुसार, चाय में पाए जाने वाले पॉलीफेनॉल (Polyphenols), फ्लेवोनॉयड्स (Flavonoids) और अन्य प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट यौगिक शरीर में होने वाले ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने, रक्त वाहिकाओं की कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने, सूजन (Inflammation) को नियंत्रित करने तथा हृदय की कोशिकाओं को दीर्घकालिक क्षति से बचाने में योगदान दे सकते हैं। यही कारण है कि कई वैज्ञानिक चाय के इन जैव सक्रिय घटकों को हृदय स्वास्थ्य के संभावित लाभों का महत्वपूर्ण आधार मानते हैं।
हालांकि, अध्ययन के अंत में शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विश्लेषण मुख्य रूप से Observational Prospective Cohort Studies पर आधारित था। इसलिए इससे केवल यह पता चलता है कि नियमित चाय सेवन और बेहतर स्वास्थ्य परिणामों के बीच एक संबंध (Association) मौजूद है। इससे यह निश्चित रूप से सिद्ध नहीं किया जा सकता कि केवल चाय ही इन सकारात्मक परिणामों का प्रत्यक्ष कारण है।
इसी वजह से वैज्ञानिकों ने सलाह दी कि चाय को किसी दवा (Medicine) या हृदय रोगों के उपचार के विकल्प के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बल्कि इसे एक संतुलित और स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा माना जाना चाहिए। यदि नियमित चाय सेवन के साथ संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव का उचित प्रबंधन और धूम्रपान से दूरी जैसी अच्छी आदतें भी अपनाई जाएं, तो हृदय स्वास्थ्य को लंबे समय तक बेहतर बनाए रखने की संभावना और अधिक बढ़ सकती है। यही इस बड़े वैश्विक Meta-analysis का सबसे महत्वपूर्ण और व्यावहारिक निष्कर्ष माना गया।
शोध 6: ब्लैक टी और कोरोनरी हार्ट डिजीज पर नवीनतम विश्लेषण
अब तक प्रकाशित अधिकांश वैज्ञानिक अध्ययनों में चाय और हृदय स्वास्थ्य के बीच संभावित संबंध पर चर्चा की गई है। हालांकि, हाल के वर्षों में कुछ शोधकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की कि क्या ब्लैक टी (Black Tea), जो दुनिया में सबसे अधिक पी जाने वाली चायों में से एक है, हृदय स्वास्थ्य पर अलग से कोई प्रभाव डालती है। इसी उद्देश्य से एक व्यापक Systematic Review और Meta-analysis प्रकाशित किया गया, जिसमें केवल ब्लैक टी के सेवन और कोरोनरी हार्ट डिजीज (Coronary Heart Disease) के बीच संबंध का विश्लेषण किया गया।
इस अध्ययन में दुनिया के विभिन्न देशों में किए गए शोधों के आंकड़ों को एक साथ जोड़ा गया। कुल मिलाकर 9.5 लाख (950,000) से अधिक लोगों के स्वास्थ्य संबंधी डेटा का विश्लेषण किया गया। इतनी बड़ी संख्या में प्रतिभागियों को शामिल किए जाने से शोधकर्ताओं को यह समझने का अवसर मिला कि नियमित रूप से ब्लैक टी पीने की आदत का हृदय स्वास्थ्य से किस प्रकार संबंध हो सकता है और क्या यह संबंध अलग-अलग आबादी में भी समान रूप से दिखाई देता है।
जब सभी अध्ययनों के परिणामों का संयुक्त विश्लेषण किया गया, तो शोधकर्ताओं ने पाया कि नियमित रूप से ब्लैक टी पीने वाले लोगों में Coronary Heart Disease का जोखिम औसतन कम देखा गया। कोरोनरी हार्ट डिजीज वह स्थिति है, जिसमें हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियां संकरी या अवरुद्ध होने लगती हैं। यही समस्या आगे चलकर हार्ट अटैक और अन्य गंभीर हृदय संबंधी जटिलताओं का कारण बन सकती है। अध्ययन के परिणामों ने संकेत दिया कि संतुलित मात्रा में ब्लैक टी का नियमित सेवन इस जोखिम को कम करने से जुड़ा हो सकता है।
शोधकर्ताओं ने केवल यह नहीं देखा कि ब्लैक टी पीने वाले और न पीने वाले लोगों के बीच क्या अंतर है, बल्कि उन्होंने Dose–Response Analysis भी किया। इस विश्लेषण का उद्देश्य यह समझना था कि जैसे-जैसे ब्लैक टी की मात्रा बढ़ती है, उसके साथ हृदय रोग के जोखिम में किस प्रकार बदलाव आता है। परिणामों से यह संकेत मिला कि सीमित और नियमित मात्रा में ब्लैक टी का सेवन संभावित रूप से लाभदायक हो सकता है। यानी, उचित मात्रा में चाय पीना बेहतर हृदय स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ दिखाई दिया।
हालांकि, शोधकर्ताओं ने इस निष्कर्ष की एक महत्वपूर्ण सीमा भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि इन परिणामों का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि जितनी अधिक चाय पी जाएगी, उतना अधिक लाभ मिलेगा। वैज्ञानिक अध्ययनों में अक्सर यह देखा गया है कि किसी भी खाद्य पदार्थ या पेय का लाभ एक निश्चित सीमा तक ही होता है। उसके बाद मात्रा बढ़ाने से लाभ आवश्यक नहीं कि बढ़े, बल्कि कुछ परिस्थितियों में नुकसान की संभावना भी बढ़ सकती है।
विशेष रूप से, ब्लैक टी में स्वाभाविक रूप से कैफीन (Caffeine) मौजूद होता है। यदि कोई व्यक्ति बहुत अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन करता है, तो कुछ लोगों में दिल की धड़कन तेज होना (Palpitations), बेचैनी (Restlessness), घबराहट, नींद में कमी (Insomnia) या अस्थायी रूप से रक्तचाप बढ़ना (Temporary Increase in Blood Pressure) जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि यह प्रभाव सभी लोगों में समान नहीं होता, क्योंकि कैफीन के प्रति संवेदनशीलता व्यक्ति-व्यक्ति में अलग-अलग हो सकती है।
इसी कारण शोधकर्ताओं ने सलाह दी कि ब्लैक टी का सेवन संतुलित मात्रा में ही किया जाना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को पहले से उच्च रक्तचाप, हृदय की अनियमित धड़कन (Arrhythmia), कैफीन के प्रति अधिक संवेदनशीलता या कोई अन्य गंभीर हृदय संबंधी समस्या है, तो उसे अपने चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही चाय की मात्रा निर्धारित करनी चाहिए।
अध्ययन का समग्र निष्कर्ष यही था कि नियमित लेकिन सीमित मात्रा में ब्लैक टी का सेवन बेहतर हृदय स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ दिखाई देता है, लेकिन इसे किसी उपचार या दवा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। हृदय को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव पर नियंत्रण, धूम्रपान से दूरी और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच जैसी अच्छी आदतें उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। चाय इन सभी स्वस्थ आदतों का एक पूरक हिस्सा हो सकती है, लेकिन अकेले उसी पर निर्भर रहना वैज्ञानिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता।
अब तक के वैज्ञानिक प्रमाण क्या संकेत देते हैं?
अब तक प्रकाशित अधिकांश उच्च गुणवत्ता वाले शोध यह संकेत देते हैं कि सीमित मात्रा में बिना अधिक चीनी वाली चाय, विशेषकर ब्लैक टी और ग्रीन टी, सामान्यतः हृदय के लिए हानिकारक नहीं मानी जाती और कई अध्ययनों में इससे हृदय रोग के जोखिम में कमी का संबंध देखा गया है।
लेकिन इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि बहुत अधिक चाय पीना हमेशा लाभदायक होगा। यदि कोई व्यक्ति दिनभर में बहुत अधिक मात्रा में कैफीन लेता है, बहुत मीठी चाय पीता है, या पहले से उच्च रक्तचाप, अनियमित धड़कन (Arrhythmia) या अन्य हृदय रोग से पीड़ित है, तो उसे अपने चिकित्सक की सलाह के अनुसार चाय का सेवन करना चाहिए।
आज उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण यही बताते हैं कि चाय का प्रभाव उसकी मात्रा, प्रकार, उसमें मिलाई गई चीनी, व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और उसकी संपूर्ण जीवनशैली पर निर्भर करता है। इसलिए केवल चाय के आधार पर हृदय का स्वास्थ्य तय नहीं किया जा सकता।
इस पूरे विषय का सरल निष्कर्ष
अब तक उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि सामान्य और सीमित मात्रा में चाय पीना अधिकांश स्वस्थ लोगों के लिए हृदय के लिए सुरक्षित माना जाता है और कई अध्ययनों में इसके संभावित लाभ भी देखे गए हैं। वहीं, बहुत अधिक मात्रा में चाय पीना, विशेष रूप से अत्यधिक कैफीन या अधिक चीनी वाली चाय का सेवन, हर व्यक्ति के लिए उचित नहीं माना जा सकता।
इसलिए यदि आप चाय पीते हैं, तो मात्रा का ध्यान रखें, उसमें चीनी कम रखें, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ। यदि आपको पहले से हृदय रोग, उच्च रक्तचाप या हृदय की धड़कन से जुड़ी कोई समस्या है, तो अपनी चाय की मात्रा के बारे में अपने चिकित्सक से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।
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चाय और दिल के स्वास्थ्य से जुड़े सामान्य प्रश्न और उनके वैज्ञानिक उत्तर
अब तक प्रकाशित अधिकांश बड़े वैज्ञानिक अध्ययनों में यह प्रमाण नहीं मिला है कि सीमित मात्रा में चाय पीने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है। कई शोधों में तो नियमित और सीमित मात्रा में ब्लैक टी या ग्रीन टी पीने वालों में हृदय रोग का जोखिम थोड़ा कम पाया गया है। हालांकि अत्यधिक मीठी चाय और अस्वस्थ जीवनशैली जोखिम बढ़ा सकती है।
उच्च रक्तचाप वाले लोग सीमित मात्रा में चाय पी सकते हैं, लेकिन उन्हें कैफीन के प्रति अपनी संवेदनशीलता का ध्यान रखना चाहिए। कुछ लोगों में कैफीन अस्थायी रूप से रक्तचाप बढ़ा सकती है। यदि आपका ब्लड प्रेशर नियंत्रित नहीं रहता या डॉक्टर ने कैफीन सीमित करने की सलाह दी है, तो उसी के अनुसार चाय का सेवन करें।
अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए दिनभर में लगभग 2 से 3 कप बिना अधिक चीनी वाली चाय सामान्य मानी जाती है। कुल कैफीन सेवन लगभग 400 मिलीग्राम प्रतिदिन से कम रखने की सलाह दी जाती है। यदि आपको हृदय रोग, उच्च रक्तचाप या कैफीन से संवेदनशीलता है, तो अपने डॉक्टर की सलाह लेना उचित रहेगा।
ब्लैक टी में फ्लेवोनॉयड्स और पॉलीफेनॉल जैसे एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो रक्त वाहिकाओं की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मदद कर सकते हैं। कई शोधों में सीमित मात्रा में ब्लैक टी के सेवन को हृदय स्वास्थ्य के लिए संभावित रूप से लाभकारी पाया गया है, लेकिन यह किसी दवा का विकल्प नहीं है।
दोनों प्रकार की चाय में लाभकारी एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। ग्रीन टी में कैटेचिन अधिक होते हैं, जबकि ब्लैक टी में थियोफ्लेविन्स और अन्य पॉलीफेनॉल होते हैं। वर्तमान वैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं कि दोनों का सीमित मात्रा में सेवन स्वस्थ जीवनशैली के साथ किया जाए तो हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है।
हाँ। यदि कोई व्यक्ति बहुत अधिक कैफीन का सेवन करता है या कैफीन के प्रति संवेदनशील है, तो कुछ समय के लिए दिल की धड़कन तेज महसूस हो सकती है। यह प्रभाव हर व्यक्ति में समान नहीं होता। यदि धड़कन बार-बार तेज हो रही हो या अनियमित महसूस हो, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।



