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चाय हमारे जीवन का एक बहुत ही आम हिस्सा है। भारत में शायद ही कोई घर होगा जहाँ दिन की शुरुआत चाय से न होती हो। सुबह की नींद खोलनी हो, काम के बीच थोड़ी ताजगी चाहिए हो या दोस्तों के साथ बातचीत करनी हो, चाय हर जगह मौजूद रहती है। इसी वजह से लोग अब यह सोचने लगे हैं कि क्या इतनी ज्यादा चाय पीना सेहत के लिए ठीक है या इससे डायबिटीज जैसी बीमारी हो सकती है।
असल में देखा जाए तो चाय खुद में कोई बीमारी पैदा करने वाली चीज नहीं है। लेकिन जब हम चाय में ज्यादा चीनी डालते हैं और इसे बार-बार पीते हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कहीं यह शरीर पर असर तो नहीं डाल रही। खासकर डायबिटीज जैसी बीमारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए लोग और भी ज्यादा सतर्क हो गए हैं इस लेख का उद्देश्य इस विशय पर आपको एक सही और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना है तो बिना देर किये अपने आज के इस लेख को शुरू करते है।
इस विषय पर WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) की रिपोर्ट क्या कहती है
विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने डायबिटीज पर कई वर्षों तक अध्ययन किया है और उसकी रिपोर्ट्स का सीधा मतलब यही निकलता है कि डायबिटीज का कारण चाय नहीं है। WHO के अनुसार इस बीमारी के पीछे सबसे बड़े कारण मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी, ज्यादा चीनी का सेवन और अनुवांशिक कारण होते हैं।
WHO यह भी स्पष्ट करता है कि बिना चीनी वाली चाय, चाहे वह ग्रीन टी हो या ब्लैक टी, सामान्य रूप से सुरक्षित मानी जाती है। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब हम मीठे पेय या ज्यादा चीनी वाली चीजों का सेवन करते हैं। इसलिए WHO के अनुसार असली समस्या चाय नहीं बल्कि उसमें डाली जाने वाली चीनी और हमारी जीवनशैली है।
इस विषय पर Harvard University की रिपोर्ट।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने कई सालों तक चाय और डायबिटीज के बीच संबंध पर अध्ययन किया। इन शोधों में लोगों की रोज़मर्रा की चाय पीने की आदतों को समझा गया। परिणामों में यह देखा गया कि जो लोग बिना चीनी वाली चाय जैसे ग्रीन टी या ब्लैक टी नियमित रूप से पीते हैं, उनमें टाइप 2 डायबिटीज का खतरा थोड़ा कम पाया गया।
लेकिन वहीं दूसरी तरफ यह भी साफ हुआ कि अगर चाय में ज्यादा चीनी मिलाई जाए तो यह पूरा फायदा खत्म हो जाता है और शरीर पर इसका कोई सकारात्मक असर नहीं रहता। इसका मतलब यह हुआ कि चाय खुद नुकसान नहीं करती, बल्कि उसका गलत तरीके से सेवन समस्या पैदा कर सकता है।
American Diabetes Association (ADA) की राय
American Diabetes Association का कहना भी काफी साफ है कि चाय सीधे तौर पर डायबिटीज का कारण नहीं बनती। उनके अनुसार असली समस्या उन पेयों में होती है जिनमें ज्यादा चीनी होती है, क्योंकि यह धीरे-धीरे शरीर की इंसुलिन क्षमता को प्रभावित कर सकती है।
ADA यह भी मानता है कि ग्रीन टी में मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर में शुगर को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। इसलिए उनके अनुसार चाय को पूरी तरह से दोष देना सही नहीं है, बल्कि यह देखना जरूरी है कि हम उसे कैसे पी रहे हैं।
यूरोप का EPIC Study क्या बताता है
यूरोप में किए गए EPIC Study में 5 लाख से ज्यादा लोगों को कई सालों तक देखा गया ताकि चाय और डायबिटीज के बीच संबंध को समझा जा सके। इस बड़े अध्ययन का निष्कर्ष यह निकला कि बिना चीनी वाली चाय और डायबिटीज के बीच कोई नकारात्मक संबंध नहीं पाया गया।
कुछ मामलों में तो यह भी देखा गया कि नियमित रूप से चाय पीने वालों में हल्का सा protective effect यानी सुरक्षा जैसा असर देखने को मिला। इसका मतलब यह हुआ कि चाय डायबिटीज का कारण नहीं है और कुछ स्थितियों में यह शरीर के लिए ठीक भी हो सकती है।
चीन में ग्रीन टी पर रिसर्च
चीन में ग्रीन टी को लेकर कई महत्वपूर्ण अध्ययन किए गए, खासकर Shanghai और Jiangsu जैसे क्षेत्रों में। इन रिसर्च में यह पाया गया कि जो लोग रोजाना 4 या उससे ज्यादा कप ग्रीन टी पीते हैं, उनमें शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर होती है और फास्टिंग ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में भी मदद मिलती है।
लेकिन इस रिसर्च में भी एक महत्वपूर्ण बात सामने आई कि यह लाभ तभी मिलता है जब व्यक्ति की लाइफस्टाइल भी सही हो। अगर खानपान और दिनचर्या खराब हो, तो केवल चाय पीने से कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ता।
जापान की Ohsaki Study
जापान में की गई बड़ी स्टडी Ohsaki Study में यह पाया गया कि ग्रीन टी पीने वाले लोगों में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा कम होता है। यहां तक कि जो लोग दिन में 6 कप या उससे ज्यादा ग्रीन टी पीते हैं, उनमें भी कोई नुकसान नहीं देखा गया, बशर्ते चाय में चीनी न हो।
इस अध्ययन से यह समझ आता है कि चाय खुद नुकसानदायक नहीं है, बल्कि सही तरीके से सेवन करने पर यह शरीर के लिए सुरक्षित है।
UK Biobank Study का निष्कर्ष
यूके में किए गए UK Biobank Study में ब्लैक टी और डायबिटीज के बीच संबंध को देखा गया। इस अध्ययन में पाया गया कि ब्लैक टी का सीमित और संतुलित सेवन डायबिटीज का खतरा नहीं बढ़ाता। कुछ मामलों में इसका असर शरीर के मेटाबॉलिज्म पर हल्का सकारात्मक भी देखा गया।
इसका मतलब यह हुआ कि चाय को लेकर डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन संतुलन हमेशा जरूरी है।
भारत में ICMR की रिपोर्ट
भारत में Indian Council of Medical Research यानी ICMR ने यह स्पष्ट किया है कि देश में डायबिटीज बढ़ने का कारण चाय नहीं है। असली समस्या मीठी चाय का अधिक सेवन, चाय के साथ बिस्किट और जंक फूड खाना, और सबसे महत्वपूर्ण शारीरिक गतिविधि की कमी है।
शहरी जीवन में लोग लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, कम चलते हैं और तनाव ज्यादा लेते हैं। यही चीजें डायबिटीज को बढ़ावा देती हैं, न कि सामान्य चाय।
निष्कर्ष
अगर हम पीछे बताई गयी सभी संस्थाओं के द्वारा बताई गयी रिपोर्ट्स को सही माने तो सभी महत्वपूर्ण संस्थाओं के शोध के द्वारा तैयार की गयी रिसर्च रिपोर्ट्स यही बताती है कि चाय अपने आप में डायबिटीज की वजह नहीं है। बिना चीनी वाली चाय सुरक्षित है और कई मामलों में फायदेमंद भी हो सकती है। असली खतरा तब होता है जब हम इसमें ज्यादा चीनी मिलाते हैं और अपनी जीवनशैली को अनदेखा करते हैं तो इससे डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
नहीं, वर्तमान वैज्ञानिक शोधों के अनुसार केवल ज्यादा चाय पीने से डायबिटीज नहीं होती। हालांकि यदि आप हर कप में अधिक मात्रा में चीनी मिलाकर दिनभर कई बार चाय पीते हैं, तो इससे शरीर में अतिरिक्त कैलोरी और शुगर बढ़ सकती है, जो लंबे समय में डायबिटीज के खतरे को बढ़ा सकती है।
हाँ, बिना चीनी की ब्लैक टी या ग्रीन टी आमतौर पर डायबिटीज के मरीजों के लिए सुरक्षित मानी जाती है। फिर भी किसी भी व्यक्ति को अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह लेना उचित होता है।
सामान्य दूध वाली चाय से ब्लड शुगर पर बहुत अधिक असर नहीं पड़ता, लेकिन यदि उसमें ज्यादा चीनी मिलाई जाए तो ब्लड शुगर बढ़ सकता है। इसलिए कम या बिना चीनी वाली चाय बेहतर विकल्प हो सकती है।
स्वस्थ व्यक्ति के लिए सामान्य रूप से 2 से 3 कप चाय पर्याप्त मानी जाती है। बहुत अधिक मात्रा में चाय पीने से कैफीन, एसिडिटी और नींद से जुड़ी समस्याएँ हो सकती हैं।
कुछ शोधों में पाया गया है कि नियमित रूप से बिना चीनी की ग्रीन टी पीने से इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर हो सकती है और टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम थोड़ा कम हो सकता है। हालांकि केवल ग्रीन टी पीने से डायबिटीज की पूरी रोकथाम नहीं की जा सकती।



